नई दिल्ली: सेना में मुस्लिम जवानों के दाढ़ी रखने के मामले में आज सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुये मुस्लिम सैनिकों के दाढ़ी रकने पर रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट में करीब सात साल पहले से ही यह मामला चला आ रहा था। इस मामले में एक याचिका दाखिल कर कहा गया था कि जब सेना में शामिल सिखों को लंबे बाल और पगड़ी पहनने की इजाजत मिली हुई है तो मुस्लिमों को क्यों नहीं।
अंसारी ने ही कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि दाढ़ी रखना धार्मिक स्वतंत्रता का मूल अधिकार का हिस्सा है। तब वायुसेना ने कहा था कि वायुसेना अधिनियम 1950 की धारा 22 के तहत लंबी दाढ़ी रखना मना है।
साल 2008 में तत्कालीन रक्षा मंत्री ने इस मामले पर कहा था कि मंत्रालय सेना के तीनों अंगों को निर्देश जारी करेगा कि लंबी दाढ़ी रखने वाले मुस्लिमों और अधिकारियों पर कोई कार्रवाई न की जाए लेकिन साल 2009 में सरकार ने इस मसले पर फिर से विचार करने का फैसला कर लिया था।
वायुसेना ने 2008 में अंसारी को हटाया
हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब मुस्लिम सैनिक को दाढ़ी रखने के कारण सेना से हटाया गया हो। 2008 में इंडियन एयरफोर्स जॉइन करने के चार साल बाद अंसारी आफताब ने दाढ़ी रखने की अनुमति मांगी थी। उन्हें नियमों के मुताबिक इसकी इजाजत नहीं मिली, जिसके बाद अंसारी 40 दिन की छुट्टी पर चले गए और ड्यूटी पर दाढ़ी बढ़ाकर वापस लौटे। अंसारी को आईएएफ के नियम न मानने के लिए 2008 में नौकरी से हटा दिया गया।
वायुसेना में एक नियम यह भी
बताया जाता है कि उसी साल इस ओर दो याचिकाएं भी दायर की गईं। इनमें से एक वायुसेना के कॉरपोरल मोहम्मद जुबैर ने, जबकि दूसरी महाराष्ट्र के पुलिसकर्मी मोहम्मद फासी ने दायर की थी। दिलचस्प बात यह है कि भारतीय वायुसेना 1 जनवरी 2002 से पहले नामांकन के समय दाढ़ी रखने वाले मुसलमानों को चेहरे पर बाल रखने की अनुमति देता है। हालांकि इसकी लंबाई और रखरखाव के संबंध में कई सारे नियम भी हैं।