लखनऊ: रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद के सबसे उम्रदराज वादकारी हाशिम अंसारी के आज हुए निधन से मुसलमानों और हिन्दुओं समेत पूरे समाज में दुख है। अंसारी (95) को बेहद करीब से जानने वाले बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के संयोजक जफरयाब जीलानी ने उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि उनके जाने से एक बोलती हुई जबान खामोश हो गयी, जो बाबरी मामले पर मीडिया और समाज में अपना सम्मान हासिल कर चुकी थी। विवादित ढांचा विवाद के वह आखिरी मूल वादी थे।
उन्होंने कहा कि अंसारी दूसरे पक्ष के लोगों से बातचीत भले ही करते थे लेकिन उनका मानना था कि इससे रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद का हल कतई नहीं निकाला जा सकता है। वह सोचते थे कि चूंकि दूसरा पक्ष बातचीत करके लिखा-पढ़ी में कोई सहमति नहीं देगा, लिहाजा मामला सिर्फ मुकदमे से ही हल होगा।
अंसारी का हृदय संबंधी बीमारियों की वजह से आज सुबह निधन हो गया। वर्ष 1949 से बाबरी मस्जिद विवाद से जुड़े 95 वर्षीय अंसारी ने आज तड़के अयोध्या स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली।
जीलानी ने बताया कि अंसारी ने ही दुनिया को अयोध्या मामले से वाकिफ कराया था और उन्हें अपनी साइकिल के कैरियर पर बैठाकर विवादित स्थल का दौरा कराया था। वर्ष 1961 में सुन्नी वक्फ बोर्ड की तरफ से इस मामले को लेकर दायर मुकदमे में वह पांचवें नम्बर के वादकारी थे।
उन्होंने बताया कि वर्ष 1958 में धारा 188 का उल्लंघन करते हुए मस्जिद में अजान देने और नमाज पढ़ने पर अंसारी को दो माह की सजा हुई थी। बाद में उन्होंने जिला जज की अदालत में अपील की थी, जिसके आदेश पर उन्हें छोड़ दिया गया था।
इस बीच, राम मंदिर आंदोलन के अहम सहभागी संगठन विश्व हिन्दू परिषद :विहिप: के प्रवक्ता शरद शर्मा ने अंसारी के निधन पर दुख प्रकट करते हुए कहा कि कट्टरतावादियों को अंसारी से सबक लेना चाहिये।