नई दिल्ली: बिलकिस बानो मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने 11 दोषियों की उम्रकैद की सज़ा बरकरार रखते हुये 3 आरोपियों को फांसी देने की सबीआई याचिका खारिज कर दी है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का फैसला बरकरार रखा है। जिन आरोपियों को ट्रायल कोर्ट ने दोषी माना उन्हें हाईकोर्ट ने भी दोषी माना है। जो 6 पुलिस वाले और 2 डॉक्टर इस केस में शामिल थे और बरी हो गए थे, उनको भी दोषी करार दिया गया है। (दिलचस्प है IAS और विधायक की लव स्टोरी, जल्द करेंगे शादी)
हालांकि जो पुलिसवाले अब दोषी पाए गए हैं वे पहले ही अपनी सज़ा काट चुके हैं, ऐसे में कायदे से उन्हें अब जेल नहीं हो सकती। ये बरी होने के बाद ये फ़ोर्स में वापस चले गए थे, लेकिन अब ये फ़ोर्स का हिस्सा नहीं हो सकते।
गौरतलब है कि मार्च 2002 में गुजरात की राजधानी अहमदाबाद से 250 किलोमीटर दूर रंधीकपुर गांव में बिलकिस के परिवार पर एक भीड़ ने हमला किया था। उस समय बिलकिस 19 साल की थीं और 5 महीने की गर्भवती थीं। उनके साथ दोषियों ने गैंगरेप किया था। उनके परिवार के 8 सदस्यों की हत्या कर दी गई थी, जिनमें तीन दिन का एक बच्चा भी था।
रेप के बाद बिलकिस को पीटा गया और मरा हुआ जानकर छोड़ दिया गया। सीबीआई ने मामले की जांच के दौरान नीमखेड़ा तालुका से न केवल 12 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया था, बल्कि 3 मार्च 2002 को भीड़ द्वारा मारे गए लोगों के शवों को बरामद करने के लिए पन्नीवेल के जंगलों में खुदाई भी करवायी थी। इस कार्रवाई में सीबीआई चार लोगों के कंकाल बरामद करने में सफल रही थी। मामले की पुष्टि के लिए इन कंकालों को डीएनए परीक्षण के लिए भेज दिया गया था।
सीबीआई ने दोषियों में से तीन के लिए मृत्युदंड देने की मांग की थी, क्योंकि उसका मानना था कि यह एक गंभीर अपराध और यह एक 'सामूहिक हत्याकांड' था। बिलकिस मामले की सुनवाई जनवरी 2005 में शुरू हुई थी।
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