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ब्यूरोक्रेट्स डिब्बे में बंद चिड़िया, काम कराने के लिए 56 इंच का सीना चाहिए: उमा

 Written By: IANS
 Published : Jan 20, 2017 11:53 pm IST,  Updated : Jan 20, 2017 11:53 pm IST

छत्तीसगढ़ के रायपुर में केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती ने यहां शुक्रवार को नौकरशाहों (ब्यूरोक्रेट्स) पर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि ब्यूरोक्रेट्स से काम कराने के लिए 56 इंच का सीना होना चाहिए।

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Uma bharti Image Source : PTI

रायपुर: छत्तीसगढ़ के रायपुर में केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती ने यहां शुक्रवार को नौकरशाहों (ब्यूरोक्रेट्स) पर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि ब्यूरोक्रेट्स से काम कराने के लिए 56 इंच का सीना होना चाहिए। भारती ने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कृषि विश्वविद्यालय में 'खाद्य और आजीविका सुरक्षा के लिए जल और भू-प्रबंधन' विषय पर पहले एशियन कान्फ्रेंस के उद्घाटन भाषण में ये बात कही। 

उमा भारती ग्राउंड वाटर बोर्ड के काम में देरी को लेकर चिंता व्यक्त कर रही थीं। उन्होंने नौकरशाहों को जिम्मेदार ठहराते हुए चुटकी ली।  उन्होंने कहा, "वो बेचारे (ब्यूरोक्रेट्स) डब्बे में बंद चिड़िया होते हैं और वे उनसे बाहर नहीं निकलते। अच्छा.. उनको बाहर निकालोगे भी तो ऐसे-ऐसे (हाथ का इशारा) आएंगे, धीरे-धीरे। उनसे कोई चीज कैंसिल करवाई जा सकती है, लेकिन इनिशिएट नहीं करवाई जा सकती। क्योंकि कैंसिलेशन इज सो ईजी, रिस्ट्रिक्शन इज सो ईजी बट जेनरेशन एंड क्रिएशन इज सो टफ, सो डिफिकल्ट.. उसके लिए 56 इंच का सीना चाहिए।"

उन्होंने कहा, "इजरायल से हमें सीखना चाहिए। वहां बहुत थोड़ी खेती में बहुत अधिक उपज कैसे होती है? वहां का क्लाइमेट भी छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्यप्रदेश जैसे राज्यों की तरह है। मैं प्रवचन न करती, राजनीति में न आती तो खेती कर रही होती।" भारती ने आगे कहा कि नरेंद्र मोदी ऐसे प्रधानमंत्री हैं, जिन्होंने विकास के मुद्दे पर चुनाव लड़ा। इससे पहले भारत में जितने भी चुनाव हुए, उनमें भावनाओं का दोहन हुआ। ये पहला चुनाव था जो मनुष्य की जरूरतों को पूरा करने का वादा करके लड़ा गया। 

उन्होंने कहा, "गुजरात के विकास की कहानी असल में वाटर मैनेजमेंट की कहानी है। हरित क्रांति में हमने असावधानी बरती। इस कारण हमारी बहुत सी जमीनें बंजर हो गईं। हमें हर जगह की क्लाइमेट के हिसाब से खेती करनी थी।" केंद्रीय मंत्री ने एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी कैंपस में स्वामी विवेकानंद एग्रीकल्चरल इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट के भवन का भूमिपूजन और शिलान्यास किया। इसके साथ ही शॉपिंग कॉम्पलेक्स और दवाखाना का लोकार्पण भी किया। इसके बाद उन्होंने तूता गांव में राष्ट्रीय भूमि जल प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान का शिलान्यास भी किया।

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