नई दिल्ली: दिल्ली सरकार के एक और फैसले की सीबीआई ने जांच शुरू कर दी है। यह मामला PWD विभाग में क्रियेटिव विंग बनाने को लेकर है। बताया जाता है कि इसके लिए भी केजरीवाल सरकार ने नियमों को ताक पर रखकर काम किया।
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एक सितंबर 2015 को दिल्ली सरकार ने PWD विभाग में क्रियेटिव विंग बनाने के लिए 16 लोगों को भर्ती करने का फैसला लिया। इसके लिए एक कंपनी को हायर किया गया जिसका नाम सोनी डिटेक्टिव अलायड सर्विस था। मजेदार बात ये है कि इस कंपनी ने इससे पहले आर्किटेक्ट के क्षेत्र में कोई काम नहीं किया था।
जितने भी स्टाफ इस कंपनी के जरिये हायर किये जाने थे उनकी सैलरी 25 हजार से 1 लाख के बीच थी। और उस सैलरी का 8 से 10 परसेंट दिल्ली सरकार को बतौर कमीशन कंपनी को देना था। इस प्रोजेक्ट के लिए उपराज्यपाल से अनुमति नहीं ली गयी और नियमों को ताक पर रख कर फैसला लिया गया।
इतना ही नहीं बारापुला प्रोजेक्ट में जो पैसे बचे थे उसी से इस कंपनी को पेमेंट दिया गया जो कि गलत था। किसी प्रोजेक्ट का पैसा कहीं किसी और प्रोजेक्ट में नहीं लगाया जा सकता। उपराज्यपाल ने सीबीआई जांच के लिए जो फ़ाइल भेजी थी उसमें ये भी एक फ़ाइल थी। कल से सीबीआई ने इस मामले की पड़ताल भी शुरू कर दी है।