1. Hindi News
  2. भारत
  3. राष्ट्रीय
  4. मुख्य सूचना आयुक्त को आयुक्तों का तबादला करने की शक्ति है: HC

मुख्य सूचना आयुक्त को आयुक्तों का तबादला करने की शक्ति है: HC

 Written By: Bhasha
 Published : Oct 25, 2016 11:22 am IST,  Updated : Oct 25, 2016 11:22 am IST

बंबई उच्च न्यायालय ने व्यवस्था दी है कि सूचना के अधिकार कानून के तहत राज्य मुख्य सूचना आयुक्त को शक्ति है कि वह आयोग के काम-काज सुचारू रूप से चलाने के लिए राज्य सूचना आयुक्तों का तबादला एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में कर सकता है।

Bombay High Court- India TV Hindi
Bombay High Court

मुंबई: बंबई उच्च न्यायालय ने व्यवस्था दी है कि सूचना के अधिकार कानून के तहत राज्य मुख्य सूचना आयुक्त को शक्ति है कि वह आयोग के काम-काज सुचारू रूप से चलाने के लिए राज्य सूचना आयुक्तों का तबादला एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में कर सकता है। न्यायमूर्ति वीएम कनाडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह अहम व्यवस्था दी है कि आरटीआई कानून की धारा 15 (4) के तहत राज्य मुख्य सूचना आयुक्त के पास ऐसी शक्ति है कि वह राज्य सूचना आयुक्तों का एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में तबादला कर सकते हैं। पीठ पुणे के पत्रकार विजय कुंभार की याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

कुंभार ने अमरावती में पदस्थ राज्य सूचना आयुक्त रविंद्र जाधव के दूसरे स्थान पर तबादला करने को चुनौती दी थी। जाधव ने अपने स्थानांतरण को चुनौती नहीं दी थी लेकिन कुंभार ने अमरावती से अन्य स्थान पर उनके तबादले को इस आधार पर चुनौती दी कि राज्य मुख्य सूचना अधिकारी के पास आरटीआई कानून के तहत राज्य सूचना आयुक्तों का तबादला करने की शक्ति नहीं है। उच्च न्यायालय इस बात से संतुष्ट था कि याचिकाकर्ता एक जिम्मेदार कार्यकर्ता है और इसलिए इसने उन्हें यह अर्जी एक जनहित याचिका के तौर पर दायर करने की अनुमति प्रदान की।

पीठ ने व्यवस्था दी, हमारे विचार से, राज्य मुख्य सूचना आयुक्त को आरटीआई कानून की धारा 15 :4: के तहत राज्य सूचना आयुक्तों का एक स्थान से दूसरे स्थान पर तबादला करने की शक्ति है ताकि राज्य में आयोग का कामकाज सुचारू रूप से चलना सुश्निचित हो सके। पीठ ने कहा कि अगर उनके अधिकार में कोई भी नियंत्रण किया जाता है तो राज्य सूचना आयोग होने का मूल उद्देश्य ही निरर्थक और परास्त हो जाएगा। हमें याचिका में कोई दम नहीं दिखता है। इसने कहा, लिहाजा याचिका खारिज की जाती है और पहले के अतंरिम आदेश को निरस्त किया जाता है।

पीठ ने कहा कि यह याद रखना चाहिए कि आरटीआई कानून को सरकार और उसके अंगों के कामकाज में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए पारित किया गया था। एक लोकतांत्रिक देश में, नागरिकों को सरकार और उनके अधिकारियों के कामकाज के बारे में सूचित करना जरूरी है ताकि मनमाने ढंग से किसी कार्रवाई की गुंजाइश न रहे और भ्रष्टाचार पर भी लगाम कसे तथा अंत में सरकार और उसके अंगों को जवाबदेह ठहराए।

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। National से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें भारत