नई दिल्ली: चीन ने संकेत दिए हैं कि अगर भारत उसे अरुणाचल का तवांग वाला हिस्सा लौटा दे, तो वह अक्साई चिन पर कब्जा छोड़ सकता है। ऐसा पहली बार नहीं है, जब चीन की ओर से इस तरह की 'पेशकश' की गई है। सीमा विवाद पर भारत से वार्ताकार रहे चीन के पूर्व वरिष्ठ राजनयिक दाई बिंगुओ ने इस बात के संकेत दिए हैं। उन्होंने बिना उल्लेख किए इशारों में कहा कि विवाद सुलझाने के लिए चीन अरुणाचल प्रदेश में तवांग के बदले अपने कब्जे का एक हिस्सा भारत को दे सकता है।
माना जा रहा है कि उनका इशारा तवांग के बदले अक्साई चिन के आदान-प्रदान की तरफ है। गौरतलब है कि तवांग भारत-चीन सीमा के पूर्वी सेक्टर का सामरिक और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण और संवेदनशील इलाका है।
तवांग के पश्चिम में भूटान और उत्तर में तिब्बत है। 1962 में चीनी सेना ने तवांग पर कब्जा करने के बाद उसे खाली कर दिया था, क्योंकि वह मैकमोहन रेखा के अंदर पड़ता था। लेकिन इसके बाद से चीन तवांग पर यह कहते हुए अपना हक जताता रहा है कि वह मैकमोहन रेखा को नहीं मानता।
चीन तवांग को दक्षिणी तिब्बत कहता है, क्योंकि 15वीं शताब्दी के दलाई लामा का यहां जन्म हुआ था। चीन तवांग पर अधिकार कर तिब्बती बौद्ध केंद्रों पर उसकी पकड़ और मजबूत करना चाहता है। सामरिक नजरिए से तवांग को चीन को देना भी भारत के लिए अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारने जैसा होगा।
बिंगुओ कुछ साल पहले रिटायर हो चुके हैं लेकिन उन्हें अभी भी चीन सरकार के करीब माना जाता है। 2013 में रिटायर होने से पहले बिंगुओ ने एक दशक से भी अधिक समय तक भारत के साथ चीन की विशेष प्रतिनिधि वार्ता का नेतृत्व किया था।
हालांकि, तवांग का आदान-प्रदान भारत सरकार के लिए आसान नहीं होगा, क्योंकि यहां पर स्थित तवांग मठ तिब्बत और भारत के बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए विशेष महत्व रखता है। बावजूद इसके दाई की टिप्पणी महत्वपूर्ण है, क्योंकि माना जाता है कि बिना किसी तरह की आधिकारिक स्वीकृति के वह इस तरह के बयान नहीं दे सकते।