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अदालत ने वकीलों की पेशी पर लगाई रोक

 Written By: India TV News Desk
 Published : Jul 31, 2016 12:39 pm IST,  Updated : Jul 31, 2016 12:43 pm IST

उच्च न्यायालय ने दो उपमंडल मजिस्ट्रेटों (एसडीएम) द्वारा जारी उस आदेश और सार्वजनिक नोटिस पर रोक लगा दी है

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नई दिल्ली: उच्च न्यायालय ने दो उपमंडल मजिस्ट्रेटों (एसडीएम) द्वारा जारी उस आदेश और सार्वजनिक नोटिस पर रोक लगा दी है जिसमें वकीलों को वैवाहिक पंजीकरण के मामलों में काम करने और एसडीएम के समक्ष पेश होने से मना किया गया था। आदेश तथा सार्वजनिक नोटिस पर स्थगन देते हुए न्यायमूर्ति संजीव सचदेव ने यह स्पष्ट किया कि, कोई भी वकील एसडीएम कार्यालय में काम नहीं करेगा और शादी के पंजीकरण के लिए पहुंचने वाले लोगों को परेशान नहीं करेगा।

अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 20 सितंबर की तारीख निर्धारित करते हुए कहा, यह निर्देश दिया जाता है कि सुनवाई की अगली तारीख तक संबंधित आदेश और सार्वजनिक नोटिस का क्रियान्वयन स्थगित रहेगा। प्रतिवादियों (एसडीएम) को निर्देश दिया जाता है कि वे वास्तविक वकीलों को शादी के पंजीकरण मामले में मुवक्किलों का काम करने और उनकी मदद करने से न रोकें।

अदालत ने नोटिस जारी कर मांगा जवाब

इसने कहा, हालांकि यह स्पष्ट किया जाता है कि कोई भी वकील बार काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा निर्धारित पेशेवर आचरण और शिष्टाचार के मानकों के विपरीत एसडीएम कार्यालय में काम नहीं करेगा और विवाह पंजीकरण के लिए आने वाले लोगों परेशान नहीं करेगा। अदालत ने अपने क्षेत्रों में विवाह अधिकारी के रूप में नियुक्त पंजाबी बाग और हौजखास के दोनों उपमंडल मजिस्ट्रेटों को नोटिस जारी कर उनसे जवाब मांगा।

यह नोटिस कुछ वकीलों की याचिका पर दायर किया गया जिन्होंने प्रतिबंध को चुनौती दी थी। वकीलों ने अपनी याचिका में कहा है कि उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में दिल्ली (आवश्यक विवाह पंजीकरण) कानून 2014 के अनुसार शादियों का पंजीकरण अनिवार्य है।

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