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जीजेएम से निष्कासित नेता दार्जिलिंग बंद को समाप्त करने के पक्ष में

 Reported By: IANS
 Published : Sep 05, 2017 03:06 pm IST,  Updated : Sep 05, 2017 03:06 pm IST

थापा को एक सितंबर को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। उनके साथ जीजेएम सहायक महासचिव व प्रमुख समन्वयक बिनय तमांग को भी पार्टी नेतृत्व ने बंगाल सरकार के साथ मिलकर साजिश रचने के आरोप में निष्कासित कर दिया। इन पर गोरखालैंड आंदोलन को पटरी से हटाने का आरोप

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दार्जिलिंग: गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जीजेएम) से कथित तौर पर पार्टी विरोधी गतिविधियोंके कारण निष्कासित किए जाने के कुछ दिनों बाद गोरखा नेता अनित थापा ने मंगलवार को कुर्सियांग में शांति की मांग करते हुए एक मौन रैली की अगुवाई की। यह रैली गोरखा जनमुक्ति मोर्चा द्वारा प्रायोजित अनिश्चितकालीन बंद के 83वें दिन निकाली गई। यह बंद पश्चिम बंगाल के उत्तरी पहाड़ी इलाके में एक अलग गोरखालैंड राज्य की मांग को लेकर चल रहा है। थापा ने कहा, "कुर्सियांग के लोग अभी भी हमारे साथ हैं। वे मुझमें विश्वास करते हैं। लोग कुछ जीजेएम नेताओं के आरोपों में कभी विश्वास नहीं करेंगे।" ये भी पढ़ें: राम रहीम ने कहा मेरे दर्द की एक ही दवा, दीदार-ए-हनीप्रीत

थापा ने रैली से पहले कहा, "मैं आज यहां लोगों से मिलने के लिए रैली में आया हूं। मैं अपने समर्थकों को निराश नहीं कर सकता।" उन्होंने कहा कि पहाड़ी क्षेत्र के लोगों को गोरखालैंड के नाम पर बंद जारी करने को लेकर भावानात्मक तौर पर ठगा जा रहा है।

थापा ने कहा, "बंद वापसी की घोषणा के बाद कई दुकानें, स्कूल व कार्यालय खुल गए थे। लेकिन, लोगों को फिर से गोरखालैंड के नाम पर भावानात्मक तौर पर ठगा जा रहा है, यह आंदोलन अब सिर्फ भावनाओं पर आधारित है। इस बंद के पीछे कोई तर्क नहीं है।"

थापा को एक सितंबर को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। उनके साथ जीजेएम सहायक महासचिव व प्रमुख समन्वयक बिनय तमांग को भी पार्टी नेतृत्व ने बंगाल सरकार के साथ मिलकर साजिश रचने के आरोप में निष्कासित कर दिया। इन पर गोरखालैंड आंदोलन को पटरी से हटाने का आरोप है। इन्होंने अनिश्चितकालीन बंद को अस्थायी रूप से वापस लेने का फैसला किया था।

थापा ने कहा कि गोरखालैंड के विचार में उनकी अटूट आस्था है। उन्होंने कहा कि वह पहाड़ों में जारी हिंसा का समर्थन नहीं कर सकते और अपनी अलग राज्य की मांग को वह संघीय ढांचे के दायरे में हासिल करने की कोशिश करेंगे।

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