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आखिर क्या है कावेरी जल विवाद, जानने के लिए पढ़ें

 Written By: IndiaTV Hindi Desk
 Published : Sep 06, 2016 11:17 pm IST,  Updated : Sep 06, 2016 11:17 pm IST

कावेरी जल विवाद अंग्रेजों के समय से चला आ रहा है। 1924 में इन दोनों के बीच समझौता हुआ, लेकिन बाद में विवाद में केरल और पुडुचेरी भी शामिल हो गए जिससे यह और मुश्किल हो गया।

Kaveri River- India TV Hindi
Kaveri River

नई दिल्ली: कावेरी विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का निर्देश आने के बाद यह मामला एकबार फिर गर्म हो गया है। तमिलनाडु के लिए पानी छोड़ने के बाद कर्नाटक में किसानों ने आंदोलन तेज कर दिया है।  आइए एक नजर डालते हैं इस पूरे विवाद पर:-

  1. कावेरी जल विवाद अंग्रेजों के समय से चला आ रहा है। 1924 में इन दोनों के बीच समझौता हुआ, लेकिन बाद में विवाद में केरल और पुडुचेरी भी शामिल हो गए जिससे यह और मुश्किल हो गया। 
  2. 1972 में गठित एक कमेटी की रिपोर्ट के बाद 1976 में कावेरी जल विवाद के सभी चार दावेदारों के बीच एग्रीमेंट किया गया, जिसकी घोषणा संसद में हुई इसके बावजूद विवाद जारी रहा।
  3. 1986 में तमिलनाडु ने अंतर्राज्यीय जल विवाद अधिनियम (1956) के तहत केंद्र सरकार से एक ट्रिब्यूनल की मांग की।
  4. 1990 में ट्रिब्यूनल का गठन हो गया। ट्रिब्यूनल ने फैसला किया कि कर्नाटक की ओर से कावेरी जल का तय हिस्सा तमिलनाडु को मिलेगा। 
  5. कर्नाटक मानता है कि ब्रिटिश शासन के दौरान वह रियासत था जबकि तमिलनाडु ब्रिटिश का गुलाम, इसलिए 1924 का समझौता न्यायसंगत नहीं। 
  6. कर्नाटक का कहना है कि तमिलनाडु की तुलना में वहां कृषि देर से शुरू हुआ। वह नदी के बहाव के रास्ते में पहले है, उसे उसपर पूरा अधिकार है।
  7. तमिलनाडु पुराने समझौतों को तर्कसंगत बताते हुए कहता है, 1924 के समझौते के अनुसार, जल का जो हिस्सा उसे मिलता था, अब भी वही मिले। केंद्र जून 1990 को न्यायाधिकरण का गठन किया और अब तक इस विवाद को सुलझाने की कोशिश चल रही है।
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