
उन्होंने बताया कि बिजली कट जाने से एक तरफ उनका गर्मी से बुरा हाल है, तो दूसरी और वे कुएं से सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं, जिससे अरबी, मिर्ची, टमाटर से लेकर पपीता के नष्ट होने का खतरा पैदा हो गया है।
मोहनगढ़ क्षेत्र के बिजली विभाग के अनुविभागीय अधिकारी (एसडीओ) पी.एन. यादव ने चर्चा करते हुए स्वीकार किया कि गांव पर तीन लाख रुपये का बिजली बिल बकाया है। लिहाजा, कनेक्शन काटने के बाद टांसफार्मर को हटा दिया गया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने किसानों को विशेष रियायत दी है, उसके बाद भी ग्याजीतपुरा की हरिजन बस्ती के परिवार बिल जमा नहीं कर रहे हैं। इसलिए यह कदम उठाया गया है।
जिले की जिलाधिकारी प्रियंका दास ने कहा कि यह बात सही है कि बकाया बिजली बिल की वसूली की जानी है, मगर सूखे के दौर में कनेक्शन नहीं काटे जाना चाहिए। वसूली तो बारिश आदि के मौसम में भी की जा सकती है। वे इस मामले को दिखवा रही हैं।
बुंदेलखंड दो राज्यों मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश में फैला हुआ है। इस क्षेत्र में कुल 13 जिले आते हैं। मध्यप्रदेश के छह और उत्तर प्रदेश के सात जिले आते हैं। सभी जिलों की कमोबेश एक जैसी हालत है। सूखे की मार ने किसान से लेकर मजदूर तक की कमर तोड़ कर रख दी है। खेत सूखे हैं, तालाबों और कुओं में पानी नहीं है, इंसान को अनाज और जानवर को चारे के लिए जूझना पड़ रहा है। संकट से जूझते इस इलाके के एक गांव के किसानों ने हालात से लड़कर किसानों ने अपनी जिंदगी को खुशहाल बनाया तो सरकार मशीनरी उसकी खुशियों छीनने पर तुल गई है।