चेन्नई: यहां के अपोलो अस्पताल ने आज मद्रास उच्च न्यायालय में कहा कि अस्पताल में जे जयललिता की ली गयी तस्वीरें उनकी इच्छा के मुताबिक मीडिया को जारी नहीं की गयीं। उसने यह भी कहा कि जयललिता के इलाज के सिलसिले में उसने जो बुलेटिन जारी किए थे वे भी उनकी इच्छाओं के अनुसार थीं।
(देश-विदेश की बड़ी खबरें पढ़ने के लिए क्लिक करें)
अस्पताल का यह जवाब पी ए जोसेफ नामक एक व्यक्ति की जनहित याचिका के जवाब में आया है। जोसेफ ने तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री की मौत पर मंडरा रहे रहस्य की जांच के लिए जांच आयोग या तथ्यान्वेषी समिति गठित करने की मांग की है।
जब यह मामला कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति एच जी रमेश और न्यायमूर्ति आर महादेवन की प्रथम पीठ के सामने आया है तब स्वास्थ्य सचिव जे राधाकृष्णन और चेन्नई के अपोलो के संबंधित अधिकारी एस एम मोहनकुमार ने जवाबी हलफनामे दायर किए।
अपोलो अस्पताल ने अपने जवाबी हलफनामे में कहा कि उसने जयललिता के स्वास्थ्य के बारे में जो भी सूचनाएं जारी की वह उनके इच्छा के अनुसार और कानून व्यवस्था के हित में रखकर जारी की गयीं। जे राधाकृष्णन ने कहा कि सारे आरोप सुनी सुनायी बातें हैं न कि तथ्य।
केंद्र सरकार की ओर से वरिष्ठ वकील जे मदनगोपाल राव ने कहा कि प्रधानमंत्री और अन्य केंद्रीय मंत्रालय को पक्षकार बनाना प्रासंगिक नहीं है, खाली गृह मंत्रालय प्रासंगिक है। मामले की अगली सुनवाई 13 मार्च को होगी।