Friday, March 06, 2026
Advertisement
  1. Hindi News
  2. भारत
  3. राष्ट्रीय
  4. हिमाचल विधानसभा में जबरन धर्मांतरण पर रोक लगाने के लिए विधेयक पारित

हिमाचल विधानसभा में जबरन धर्मांतरण पर रोक लगाने के लिए विधेयक पारित

Reported by: IndiaTV Hindi Desk Published : Aug 30, 2019 03:59 pm IST, Updated : Aug 30, 2019 03:59 pm IST

हिमाचल प्रदेश विधानसभा ने जबरन, प्रलोभन देकर और शादी करके धर्मांतरण करने के खिलाफ शुक्रवार को विधेयक पारित किया।

Himachal Pradesh Assembly- India TV Hindi
Himachal Pradesh Assembly File Photo

शिमला: हिमाचल प्रदेश विधानसभा ने जबरन, प्रलोभन देकर और शादी करके धर्मांतरण करने के खिलाफ शुक्रवार को विधेयक पारित किया। विपक्ष ने हिमाचल प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता विधेयक 2019 का समर्थन किया और यह विधेयक ध्वनिमत से पारित हुआ। चर्चा का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि नया कठोर कानून इसलिए जरुरी हो गया था क्योंकि खासकर रामपुर और किन्नौर में जबरन धर्मांतरण बढ़ता जा रहा है। 

यह विधेयक हिमाचल प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम 2006 का स्थान लेगा। नये कानून के तहत सात साल तक की कैद का प्रावधान है जबकि पुराने कानून में तीन साल की कैद की सजा की व्यवस्था थी। यह विधेयक बहकाने, जबरन, अनुचित तरीके से प्रभावित करने, दबाव, लालच, शादी या किसी भी धोखाधड़ी के तरीके से धर्म परिवर्तन पर रोक लगाता है। यदि कोई भी शादी बस धर्मांतरण के लिए होती है तो वह इस विधेयक की धारा पांच के तहत अमान्य माना जाएगा। इस विधेयक पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए कांग्रेस विधायक आशा कुमारी, सुखविंदर सुखु, जगत सिंह नेगी और एकमात्र माकपा विधायक राकेश सिंह ने कुछ प्रावधानों में बदलाव की मांग की। 

सुखविंदर सुखु के सुझाव पर जवाब देते हुए ठाकुर ने कहा कि 13 साल पुराना कानून इतना प्रभावी नहीं था। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने पुराने कानून में संशोधन करने के बजाय नया कानून लाने का निर्णय लिया क्योंकि पुराने कानून में महज आठ धाराएं हैं तथा उसमें करीब दस और धाराएं जोड़ना बेहतर नहीं होता। विधेयक के अनुसार अगर कोई शख्स अपना मजहब बदलना चाहता है तो उसे कम से कम एक महीने पहले जिलाधिकारी को लिखकर देना होगा कि वह अपनी मर्जी से धर्मांतरण कर रहा है। धर्मांतरण कराने वाले पुरोहित/पादरी या किसी धर्माचार्य को भी एक महीने पहले इसकी सूचना देनी होगी। अपने मूल धर्म में वापस आने वाले व्यक्ति पर ऐसी कोई शर्त नहीं होगी। अगर दलित, महिला या नाबालिग का जबरन धर्मांतरण कराया जाता है तो दो से सात साल तक की जेल की सज़ा मिल सकती है। 

Latest India News

Google पर इंडिया टीवी को अपना पसंदीदा न्यूज सोर्स बनाने के लिए यहां
क्लिक करें

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। National से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें भारत

Advertisement
Advertisement
Advertisement