नई दिल्ली: आखिरकार लंबे इंतजार के बाद राफेल डील पर मुहर लग गई है। रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर ने भारत-फ्रांस के बीच 36 राफेल विमानों के लिए 58,000 करोड़ की डील पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इस सौदे के लिए फ्रांस के रक्षा मंत्री ज्यां यीव ली ड्रियान 22 सितंबर को ही दिल्ली आ गए थे।
रक्षा मंत्रालय के सू़त्रों ने बताया कि पिछले 20 वर्षों में यह लड़ाकू विमानों की खरीद का पहला सौदा है। इसमें अत्याधुनिक मिसाइल लगे हुए हैं जिससे भारतीय वायु सेना को मजबूती मिलेगी। इस पर रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर और फ्रांस के रक्षा मंत्री की उपस्थिति में हस्ताक्षर किये गये। उनके साथ देसाल्ट एविएशन, थेल्स और एमबीडीए के सीईओ के साथ शीर्ष सरकारी अधिकारी भी थे।
रक्षा सूत्रों ने बताया कि इस लड़ाकू विमान की खरीद पर संप्रग सरकार के काल की कीमत की तुलना में करीब 75 करोड़ यूरो बचाये जा सकेंगे जिसे नरेन्द्र मोदी सरकार ने रद्द कर दिया था। इसके अलावा इसमें 50 प्रतिशत आफ सेट का प्रावधान भी रखा गया है। इसका अर्थ यह हुआ कि छोटी बड़ी भारतीय कंपनियों के लिए कम से कम तीन अरब यूरो का कारोबार और आफसेट के जरिये सैकड़ों रोजगार सृजित किये जा सकेंगे।
राफेल लड़ाकू विमानों की आपूर्ति 36 महीने में शुरू हो जायेगी और यह अनुबंध किए जाने की तिथि से 66 महीने में पूरी हो जाएगी। डसाल्ट वायुसेना को मुफ्त में प्रशिक्षण भी देगी। इतना ही नहीं, फ्रांस पायलटों के प्रशिक्षण के लिए 60 घंटे की अतिरिक्त उड़ान की गारंटी देगा। साथ ही हथियारों के स्टोरेज के लिए 6 महीने की अतिरिक्त गारंटी देगा। मसलन अगर आपका हथियारों का डिपो तैयार नहीं हो पाया है तो फ्रांस अपने यहां छह महीने और रख सकता है, इसके लिए कोई अलग से कीमत नहीं देनी होगी।