नई दिल्ली: नई-नवेली दुल्हनों के साथ सुहागरात मनाकर और पूरे परिवार को लूटकर फरार होने वाले ‘कुंवारे जंवाई राजा’ जीयाराम की बारमेर में शनिवार को मौत हो गई। उसकी मौत शनिवार तड़के करीब चार बजे हुई। पुलिस को इसकी जानकारी सुबह 11 बजे मिली। करीब साढ़े तीन दशक तक पुलिस को छकाने वाले जीयाराम के शव को पुलिस के आने से पहले किसी ने हाथ भी नहीं लगाया। पुलिस ने शव बरामद कर पोस्टमार्टम करवाकर अंतिम संस्कार करवाया।
जंवाई राजा के नाम से कुख्यात जीयाराम ने 55 से ज्यादा दुल्हनों के साथ सुहागरात मनाया। अब तक उसके खिलाफ 17 ऐसे मामले दर्ज है, क्योंकि लोक-लाज के चलते कइयों ने शिकायत ही नहीं की। पूर्व में कई बार जेल की सजा काट चुके जीयाराम ने पुलिस पूछताछ में यह सनसनीखेज खुलासा किया था।
चोरी की वारदातों को सफाई से अंजाम देने के लिए हीं उसने जंवाई राजा बनने का स्वांग किया। दूर-दराज की एकल ढाणियों पर जीया निगाह रखता। वह यह ध्यान रखता कि किस घर में नई-नई शादी हुई है और दुल्हन पहली बार पीहर आई हुई है। दुल्हन के परिजनों को जंवाई राजा का इंतजार है। वह उस घर पहुंच जाता, जहां पुरुष सदस्य नहीं होता। रात के अंधेरे में जंवाई बनकर वह रुक जाता। फिर देर रात चोरी की वारदात को अंजाम देकर फरार हो जाता।
बताया जा रहा है कि उसकी तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई थी। फेफड़े पूरी तरह से खराब हो चुके थे। आरोपी जीयाराम के खिलाफ घर में घुसकर दुल्हनों के जेवरात चुराने सहित 17 मामले दर्ज है।
जीयाराम के खिलाफ पहली बार वर्ष 1988 में चौहटन थाने में घर में घुसने का मामला दर्ज हुआ। वर्ष 1990 व 1991 में सिणधरी, 1992 में समदड़ी, 1993 में धोरीमन्ना, 1995 में चौहटन, 1996 में सिणधरी थानान्तर्गत रात्रि में घर में घुसकर चोरी करने के मामले दर्ज हुए। वर्ष 1994 में सिणधरी थाने में उसके विरुद्ध छेड़छाड़ का मामला दर्ज हुआ। 1994 में पुलिस ने उसकी हिस्ट्रीशीट खोल दी। इसके बाद वर्ष 2003 तक वह लगातार वारदातों को अंजाम देता रहा।