नई दिल्ली: गांदरबल जिले के शादीपुर में झेलम और सिंध नदी के संगम वाले स्थान प्रयाग में 75 वर्ष के बाद मंगलवार को कश्मीर महाकुंभ का आयोजन हुआ। इसमें राज्य व देश के विभिन्न हिस्सों से हजारों की संख्या में कश्मीरी पंडितों ने हिस्सा लेकर संगम वाले स्थान पर स्नान किया और पूजन करके अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
इसमें शामिल रहे कश्मीरी पंडितों के मुताबिक, महाकुंभ 10 पिंडों पर केंद्रित है जिसमें सूर्य भी शामिल है। कश्मीरी पंडित ने बताया, 'ऐसा कुंभ पिछली बार 4 जून 1941 में हुआ था।'
वहीं कश्मीरी पंडितों का कहना था कि सरकार की तरफ से उचित व्यवस्था न किए जाने के कारण काफी समस्याओं का सामना करना पड़ा।झेलम और सिंध नदी के संगम वाले स्थान पर एक छोटे से टापू पर चिनार के पेड़ के नीचे भगवान शंकर शिवलिंग के रूप में मौजूद हैं और मंदिर का निर्माण किया गया है।
भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और अभिनेता शम्मी कपूर की अस्थियां उनकी वसीयत के अनुसार झेलम-सिंधु के संगम में भी बहाई गई थीं। महाकुंभ के आयोजन के समानांतर ही 11 जून को संघ से जुड़ा संगठन शेषाद्री समारोह समिति आचार्य अभिनवगुप्त यात्रा का आयोजन कर रही है। अभिनवगुप्त गुफा बडग़ाम जिले के बीरवाह में है।