नई दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय ने आज योगेंद्र यादव के नेतृत्व वाले स्वराज इंडिया की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें इस पार्टी के सभी उम्मीदवारों को दिल्ली नगर निगम चुनाव में समान चुनाव चिह्न दिए जाने का आग्रह किया गया था।
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न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति चंद्रशेखर की पीठ ने कहा कि इस एमसीडी चुनाव में उनकी पार्टी के सभी उम्मीदवारों को एक समान चुनाव चिह्न आवंटित करना जारी चुनाव प्रक्रिया को कमजोर करने के बराबर होगा। पीठ ने कहा कि पंजीकृत और गैर-मान्यताप्राप्त दलों को एक समान चुनाव चिह्न देने के लिए विस्तार से सुनवाई करनी होगी और तभी निर्णय पर पहुंचा जा सकता है।
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अगली सुनवाई 19 जुलाई को होगी। पीठ ने कहा, हम आगामी निगम चुनाव में आवेदक (स्वराज इंडिया) को समान चुनाव चिह्न देने के वास्ते कोई अंतरिम आदेश जारी करने को तैयार नहीं हैं। पीठ ने यह भी कहा कि अंतरिम आदेश कोई अंतिम मत नहीं है। दिल्ली नगर निगम चुनाव आगामी 23 अप्रैल को होने हैं।
पीठ ने कहा कि मामले पर यह विचार किए जाने की आवश्यकता है कि पंजीकृत और गैर मान्यताप्राप्त दल के सभी उम्मीदवारों को समान चुनाव चिह्न दिया जाना चाहिए या नहीं। उच्च न्यायालय का अंतरिम आदेश स्वराज इंडिया के अंतरिम आवेदन पर आया जिसमें एमसीडी चुनाव में पार्टी के सभी उम्मीदवारों को समान (एक ही) चुनाव चिह्न दिए जाने का आग्रह किया गया था। चुनाव नामांकन की आज अंतिम तारीख है।
अदालत ने कहा कि अंतरिम राहत देना समूची चुनाव प्रक्रिया को कमजोर करने के बराबर होगा। पीठ ने एकल न्यायाधीश के उस आदेश को भी बरकरार रखा जिसमें दिल्ली राज्य चुनाव आयेाग के इस रख में दम पाया गया था कि ईवीएम पर उम्मीदवारों की तस्वीरें होंगी और समान चिह्न ना होने से पार्टी को कोई नुकसान नहीं होगा।
एकल न्यायाधीश ने 29 मार्च को कहा था कि चूंकि याचिका चुनाव प्रक्रिया जारी होने के बाद दायर की गई, इसलिए अदालत के हस्तक्षेप के लिए बहुत देर हो गई है। एकल न्यायाधीश का फैसला पार्टी की उस याचिका पर आया जिसमें पार्टी को एमसीडी चुनाव में समान चुनाव चिह्न न दिए जाने के दिल्ली चुनाव आयोग के फैसले को चुनौती दी गई थी।
स्वराज इंडिया ने चुनाव आयोग की 14 मार्च 2017 की अधिसूचना तथा अप्रैल 2016 के उसके इस आदेश को रद्द किए जाने का आग्रह किया था जिसमें कहा गया था कि इस तरह के दलों के उम्मीदवारों को चुनाव चिह्न आवंटन के लिए निर्दलीय उम्मीदवार के समान माना जाएगा।