राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के प्रमुख शरद कुमार ने उनके हवाले से मीडिया में छपी इन ख़बरों को ग़लत बताया कि उन्होंने पठानकोट हमले में पाकिस्तान सरकार या पाकिस्तानी एजेंसियों को क्लीन चिट दी है। उन्होंने कहा कि जांच का काम अभी चल रहा है और हम अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच पड़ताल कर रहे हैं जिसमें ''स्टेट एक्टर्स” भी शामिल है जिनके तार हमले की साज़िश से जुड़े हो सकते हैं।
जांच एजेंसी के महा निदेशक ने कहा कि जांच में इस हमले में जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख और उसके भाई के अलावा अन्य दो लोगों के शामिल होने के पर्याप्त और पुख़्ता सबूत मिले हैं जो उन्होंने पाकिस्तान से साझा भी किए हैं लेकिन अभी तक वहां से कोई जवाब नहीं आया है। शरद कुमार ने कहा कि उनकी एजेंसी ने भारत में अपनी जांच पूरी कर ली है और अब पाकिस्तान जाकर जांच करन के लिए वहां के सरकार की मंज़ूरी का इंतज़ार कर रही है।
उन्होने कहा कि जहां तक इस मामले में आरोप-पत्र की बात है तो अगर पाकिस्तान हमें वहां जाने की इजाज़त नहीं भी देता तब भी हम आरोप-पत्र दाख़िल कर देंगे। हमारे पास मौलाना मसूद अज़हर और उसके भाई रऊफ़ अज़हर के ख़िलाफ़ पार्याप्त ठोस सबूत हैं। हम इन्हें आरोप-पत्र में शामिल करेंगे।”
इस बीच विदेश मंत्रालय ने कहा है कि पठानकोट हमले में पाकिस्तानी नागरिकों के शामिल होने की बात एक स्वीकार्य तथ्य है। मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरुप ने कहा कि विदेश सचिव एस. जयशंकर ने नयी दिल्ली में अप्रैल में पाकिस्तान के विदेश सचिव को भी ये बात बताई थी और कहा था कि पाकिस्तान के संयुक्त जांच दल की वापसी के बाद जांच की समीक्षा का समय आ गया है।
पाकिस्तान के संयुक्त जांच दल को पठानकोट में आकर हमले की जांच करने की इजाज़त दी गई थी और उसने तमाम वो सबूत इकट्ठा किए थे जो वो चाहते थे।
प्रवक्ता ने कहा, “पाकिस्तान में जांच के लिए पाकिस्तान सरकार को पर्याप्त सूचनाएं दी जा चुकी हैं। हम पाकिस्तान के जवाब का इंतज़ार कर रहे हैं और इस समय जबकि जांच चल रही है, अटकलें लगाना ठीक नहीं है।”
इस साल जनवरी में पठानकोट में एयर फ़ोर्स बेस पर हमला किया गया था जिसके बाद 80 घंटे चली मुठभेड़ में चार आतंकवादी मारे गए थे और सात सुरक्षाकर्मी शहीद हुए थे।