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…. तो अब पेश नहीं होगा रेल बजट!

 Written By: India TV News Desk
 Published : Jun 22, 2016 01:13 pm IST,  Updated : Jun 22, 2016 03:22 pm IST

नीति आयोग ने मोदी सरकार से सिफारिश की है कि रेल बजट को अलग से पेश करना समय और पैसे की बर्बादी है इसलिए इसे आम बजट के साथ ही पेश किया जाना चाहिए।

rail budget- India TV Hindi
rail budget

नई दिल्ली: साल दर साल लोकलुभावन घोषणाओं का प्लेटफार्म बनते जा रहे रेल बजट को सरकार खत्म कर सकती है। इसके साथ ही रेल बजट में किराये-भाड़े में कमी या बढ़ोतरी और विशेष रियायतों की बड़ी-बड़ी घोषणाओं का दौर खत्म हो सकता है। ऐसा होने पर रेलवे का वित्तीय लेखा-जोखा अन्य मंत्रालयों की तरह देश के आम बजट में ही संसद के समक्ष रखा जाएगा।

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक नीति आयोग ने मोदी सरकार से सिफारिश की है कि रेल बजट को अलग से पेश करना समय और पैसे की बर्बादी है इसलिए इसे आम बजट के साथ ही पेश किया जाना चाहिए। यदी ऐसा हुआ तो सुरेश प्रभु संसद में रेल बजट पेश करने वाले आखिरी रेल मंत्री साबित होंगे।

पीएमओ ने ही इस मसले पर नीति आयोग से सलाह मांगी थी जिसके जवाब में आयोग ने प्रधानमंत्री को 20 पन्नों की एक रिपोर्ट सौंपी है। इस रिपोर्ट का लब्बोलुआब ये ही है कि रेल बजट अलग से पेश करना अब बंद कर दिया जाना चाहिए।

वर्ष 1924 में पहली बार रेल बजट को आम बजट से अलग पेश किया गया था। ब्रिटिश राज से आज तक रेल बजट अलग से पेश होने के बावजूद इस क्षेत्र में निवेश बढ़ नहीं पाया है और रेलवे आज भी इसकी समस्या से जूझ रहा है।

रिपोर्ट में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि रेल बजट सिर्फ नई ट्रेन, नए रूट, नई घोषणाओं का पुलिंदा बन कर रह गया है। रेल बजट में रेलवे की जरूरत क्या है, इस पर ध्यान नहीं दिया जाता है।

सवाल उठाए गए हैं कि पिछले वर्ष के वित्तीय नतीजों के बजाए रेल बजट वार्षिक रिपोर्ट, विजन डॉक्युमेंट या नई नीतियों की घोषणाओं के आधार पर किया जाता है जोकि दूसरे मंत्रालय तैयार करते हैं। रिपोर्ट में यह भी सवाल उठाए गए हैं कि रेल बजट में सरकार पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है पर गवर्नेंस पर कम ध्यान दिया जाता है।

सूत्रों ने हालांकि इस बात को स्वीकार किया कि रेल बजट का 90 साल पुराना इतिहास है और यह तब से पेश किया जा रहा है। इसलिए इसे खत्म करने पर विरोध भी हो सकता है।

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