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कश्मीर: इसलिए उपद्रवियों को तितर-बितर करने में नाकाम रहीं पावा शेल्स

 Written By: Bhasha
 Published : Oct 10, 2016 08:13 pm IST,  Updated : Oct 10, 2016 08:13 pm IST

कश्मीर में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पैलेट गन के विकल्प के रूप में हाल ही में लाए गए पावा गोलों में केंद्र सरकार बदलाव का विचार कर रही है क्योंकि कुछ विसंगतियों की वजह से ये कम प्रभावी साबित हुए हैं।

Representative Image | AP File Photo- India TV Hindi
Representative Image | AP File Photo

नई दिल्ली: कश्मीर में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पेलेट गन के विकल्प के रूप में हाल ही में लाए गए पावा गोलों में केंद्र सरकार बदलाव का विचार कर रही है क्योंकि कुछ विसंगतियों की वजह से ये कम प्रभावी साबित हुए हैं। आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि जम्मू कश्मीर में सुरक्षा बलों ने खासतौर पर सीआरपीएफ ने जमीनी मूल्यांकन किया है और उनका मानना है कि मिर्च पाउडर से भरे पावा गोले प्रदर्शन कर रही भीड़ को पूरी तरह तितर-बितर करने में कामयाब नहीं रहे। 

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दरअसल, अपने आप पिघलने वाला गोले का कवर पिघलने में वक्त लेता है और इस दौरान भीड़ तेजी से इन गोलों को जवानों पर वापस उछाल देती है। सूत्रों के मुताबिक गोलों के फटने के बाद इनसे निकलने वाले मिर्च के गुबार के असर को भी बढ़ाने की जरूरत है। ग्वालियर स्थित सीमा सुरक्षा बल (BSF) की आंसूगैस यूनिट (टीएसयू) से इन विसंगतियों को दूर करने को तथा बदलाव के बाद नई खेप भेजने को कहा गया है। 

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कश्मीर में पेलेट गन के इस्तेमाल से बड़ी संख्या में लोगों के हताहत होने के बाद भीड़ नियंत्रण के लिए एक विकल्प तलाशने के लिहाज से विशेषज्ञों की समिति गठित की थी। समिति ने पावा गोलों को तरजीह दी जो कम घातक माने गए और अस्थाई रूप से भीड़ को निस्तेज करने में सक्षम हैं।

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