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India TV की मुहिम का असर, Jabalpur में गरीब टैंपों वाले की पिटाई करने वाले तीन लोग गिरफ्तार

 Edited By: IndiaTV Hindi Desk
 Published : Oct 16, 2020 11:12 pm IST,  Updated : Oct 17, 2020 07:53 am IST

जबलपुर में एक गरीब टैंपों वाले को बेरहमी से मार-मार कर अधमरा करने वाले अपराधी को आज पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी ने टैंपो वाले को क्रूरता से पीटा था। अब चार में से तीन बदमाश पुलिस की गिरफ्त में है लेकिन एक अभी भी फरार है।

Police arrested main accused in attack on auto driver in Jabalpur- India TV Hindi
Police arrested main accused in attack on auto driver in Jabalpur

जबलपुर में एक गरीब टैंपों वाले को बेरहमी से मार-मार कर अधमरा करने वाले अपराधी को आज पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी ने टैंपो वाले को क्रूरता से पीटा था। अब चार में से तीन बदमाश पुलिस की गिरफ्त में है लेकिन एक अभी भी फरार है। जिस अभिषेक दुबे नाम के हिस्ट्रीशीटर को पुलिस ने आज पकड़ा है, उसी ने टैंपो वाले को बुरी तरह मारा था और बाइक पर रखकर थाने के बाहर फेंक कर फरार हो गया था।

पुलिस ने अभिषेक दुबे को गाजियाबाद से पकड़ा है। जिस वक्त पुलिस ने इसे पकड़ा उस वक्त दूसरा अपराधी चंदन सिंह भी उसके साथ ही था लेकिन वो पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया। 11 अक्टूबर को अजीत विश्वकर्मा नाम के ऑटोवाले को हैवानों की तरह पीटने वाले बदमाश अभिषेक दुबे को जबलपुर पुलिस ने यूपी के गाजियाबाद से पकड़ा। दोनों

आरोपी अभिषेक दुबे और चंदन सिंह नेपाल भागने की फिराक में थे। पुलिस अभिषेक दुबे को पकड़कर जबलपुर लाई। इसके बाद शहर में इस अपराधी का जुलूस निकाला गया। सड़क पर चारों तरफ से पुलिस ने इसे घेर रखा था, हाथ में हथकड़ी थी। लोगों को बताया जा रहा था कि इस बदमाश ने क्या कारनामा किया है और खुद इस बदमाश से नारा लगवाया जा रहा था कि अपराध करना पाप है। 

जिस वक्त पुलिस जबलपुर के बदमाश अभिषेक दुबे की परेड करा रही थी तब तो वो कह रहा था कि अपराध करना पाप है लेकिन जैसे ही पुलिस स्टेशन के पास पहुंचा तो इंडिया टीवी के संवाददाता अभय पाराशर ने इस दरिंदे से बात की तो उसकी बातों में, उसके चेहरे पर कोई पछतावा नहीं था। इस क्रिमिनल ने झूठ बोला, लोगों की हमदर्दी हासिल करने की कोशिश की। अभिषेक दुबे ने कहा कि चूंकि टैंपो की टक्कर से उसकी बहन की हड्ड़ी टूट गई इसलिए उसे गुस्सा आया। इस शख्स ने कहा कि वो निर्भया केस के बाद मोमबत्ती जलाने वालों में नहीं है। 

ये शख्स झूठ बोल रहा था जिन लड़कियों की टू व्हीलर के साथ टैंपो की टक्कर हुई थी वो लड़िकयां इस अपराधी की बहन नहीं थी। ये सही है कि इन लडकियों ने फोन करके अपराधियों को बुलाया था और इसने टैंपो वाले को मार-मार कर अधमरा कर दिया था। अब पुलिस ने इनका इलाज किया है। जबलपुर के ASP ने बताया कि जैसे ही इस अपराधी को पता लगा कि उसकी करतूत का वीडियो पूरे देश ने देखा है, पुलिस उसे खोज रही है तो वो अपने साथी चंदन सिंह के साथ मध्य प्रदेश से ही बाहर भाग गया। लेकिन पुलिस की टीम पीछे थी। ASP ने कहा कि अभिषेक दुबे तो पकड़ा गया है और चंदन सिंह भी जल्दी ही पुलिस की गिरफ्त में होगा। 

जबलपुर में हैवानियत का वीडियो 11 अक्टूबर का है। वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हुआ था। 11 अक्टूबर को टैंपो ड्राइवर अजीत विश्वकर्मा टैंपो पर बिल्डिंग मैटेरियल लादकर जा रहा था। सामने से दो लड़कियां टू व्हीलर पर आ रही थी। टैंपो से टू व्हीलर में हल्की सी टक्कर लग गई। टू व्हीलर डिसबैलेंस हो गया और लड़कियां गिर गई। टैंपो वाला भागा नहीं रूक गया। पहले लड़कियों ने टैंपो वाले से हाथापाई की।  इस बीच लड़कियों ने अपनी जान पहचान वालों को फोन करके बुला लिया। 

उसके बाद मौके पर एक कार आ गई। एक बाइक पर कुछ लोग आ गए और टैंपो वाले को पीटना शुरू कर दिया। टैंपो वाला गिडगिड़ाता रहा लेकिन गुंडों पर हैवानियत सवार थी। एक शख्स ने अधमरा हो चुके टैंपो ड्राइवर को उठाकर पटक दिया। अजीत विश्वकर्मा अधमरा हो गया, बेहोश हो गया लेकिन गुंडों को रहम नहीं आया। .टैंपो से जो लोहे का सामान नीचे गिरा था उस आयरन प्लेट को उठाकर गुंड़ों ने अजीत विश्वकर्मा के ऊपर फेंक दिया।

बेहोश पड़े ऑटो ड्राइवर को इस गुंडे ने फिर घसीटा और फिर पीटा जिस वक्त चार बदमाशों ने ऑटो वाले के साथ बेरहमी से मारपीट की आसपास दर्जनों लोग भीड़ लगाकर ये सब देख रहे थे। भीड़ सिर्फ तमाशा देखती रही, न तो किसी ने इन अपराधियों को रोकने की कोशिश की और न ही किसी ने पुलिस को फोन किया। हद तो ये है कि ये बदमाश बेदम हो चुके ऑटोवाले को बाइक पर लादकर थाने पर फेंक आए। 

अभिषेक दुबे के खिलाफ पहले से 14 केस दर्ज हैं। वो घोषित अपराधी है लेकिन जमानत पर जेल से बाहर आ जाता है और फिर गुनाह करता है। अब ऐसा नहीं होगा क्योंकि पुलिस ने अभिषेक दुबे के खिलाफ हत्या की कोशिश की धाराओं के साथ-साथ NSA भी लगाया है। इसका मतलब है कि इस अपराधी को अब छह महीने तक जमानत नहीं मिलेगी। कम से कम छह महीने तो जेल में रहेगा। उसके बाद भी जमानत पर बाहर आ सकेगा इसकी उम्मीद कम है। 

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