नई दिल्ली: भारत को भले ही तीन वर्ष पहले पोलियो मुक्त देश होने का प्रमाण-पत्र विश्व स्वास्थ्य संगठन से मिल चुका है लेकिन हैदराबाद रेलवे स्टेशन के पास से विशेषज्ञों को वैक्सीन डिराइव पोलियो वायरस (वीडीपीवी) मिलने से कान खड़े हो गए हैं।
इस वायरस का पता सीवेज वाटर के लैब टेस्ट के दौरान लगा था। वायरस का नाम वीडीपीवी टाइप-2 है। बता दें कि देश में 2010 के बाद पोलियो का कोई वायरस नहीं पाया गया था। लेकिन अब टेस्ट में इस वायरस का पता लगने के बाद राज्य सरकार काफी सतर्क हो गई है।
इसे गंभीरता से लेते हुए तेलंगाना सरकार ने पोलियो के खिलाफ एक विशेष अभियान छेड़ने का फैसला किया है। राज्य के स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव राजेश्वर तिवारी ने बताया कि तेलंगाना के अंबरपेट से लिए गए सीवेज के पानी के नमूने की जब लैब मे जांच की गई तो उसमें "वैक्सीन ड्राइव्ड पोलियो वायरस-टाइप टू" प्रकार का वायरस पाया गया।
तिवारी ने बताया कि सरकार ने रंगारेड्डी जिले में आगामी 20 से 26 जून तक सरकार ने पोलियो के खिलाफ विशेष अभियान छेड़ने का फैसला किया है। अभियान छह हफ्ते से तीन साल की उम्र के बच्चों के लिए चलाया जाएगा।
स्वास्थ्य मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि यह वैक्सीन डिराइव पोलियो वायरस इतना खतरनाक नहीं होता लेकिन किसी भी मामले को हल्के में नहीं लिया जा सकता है। इसीलिए मंत्रालय ने उस इलाके में पोलियो से बचाने के लिए वैक्सीन देने के अभियान को और तेज करने का निर्णय लिया है।