पश्चिम बंगाल में तृणूमल कांग्रेस के संस्थापकों में से एक मुकुल रॉय शुक्रवार को बीजेपी में शामिल हो गए। जमीनी समर्थन रखनेवाले रॉय पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक जाना-माना चेहरा हैं। उन्होंने दो दशक पहले ममता बनर्जी के साथ कांग्रेस छोड़ दिया था और तृणमूल कांग्रेस बनाई थी। ममता बनर्जी के बाद पार्टी में उनका दूसरा स्थान था। वे पार्टी के महासचिव और वाइस प्रेसीडेंट रहे। मुकुल रॉय दो बार राज्यसभा के मेंबर भी रहे। एक जमाना था जब वे ममता के सबसे करीबी थे। ममता ने दिनेश त्रिवेदी की जगह उन्हें रेल मंत्री बनवाया था। लेकिन शारदा स्कैम और नारदा स्टिंग ऑपरेशन में मुकुल रॉय का नाम आने के बाद पिछले कुछ महीने से दोनों के रिश्तों में खटास आ गई थी। ममता बनर्जी द्वारा साइडलाइन किए जाने के बाद मुकुल रॉय ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। बीजेपी में उनका शामिल होना तृणमूल सुप्रीमो ममता के लिए बड़ा लॉस है। वहीं दूसरी ओर बीजेपी को पश्चिम बंगाल में एक बड़ा चेहरा मिल गया जो अब तक बीजेपी के पास नहीं था। लेकिन अब जब बीजेपी नारदा और शारदा जैसे घोटालों को लेकर ममता पर सवाल उठाएगी तो वो जबाव में मुकुल रॉय का नाम लेंगी क्योंकि दोनों मामलों में मुकुल रॉय का नाम है। अब बीजेपी ने इसका कोई जबाव खोजा है या नहीं यह मालूम नहीं। (रजत शर्मा)
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RAJAT SHARMA BLOG: मुकुल रॉय का बीजेपी में शामिल होना ममता के लिए बड़ा नुकसान
ममता बनर्जी द्वारा साइडलाइन किए जाने के बाद मुकुल रॉय ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। बीजेपी में उनका शामिल होना तृणमूल सुप्रीमो ममता के लिए बड़ा लॉस है। वहीं दूसरी ओर बीजेपी को पश्चिम बंगाल में एक बड़ा चेहरा मिल गया जो अब तक बीजेपी के पास नहीं था।
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