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Coronavirus महामारी से बचाव के लिए उठाए कदमों के लिए सोनिया गांधी ने की पीएम मोदी की तारीफ, दिए 5 सुझाव

 Edited By: IndiaTV Hindi Desk
 Published : Apr 07, 2020 02:19 pm IST,  Updated : Apr 07, 2020 02:19 pm IST

कांग्रेस की अंतरिक अध्‍यक्ष सोनिया गांधी ने कोरोना वायरस संकट के बीच उठाए गए कदमों के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तारीफ की है। सोनिया गांधी ने पीएम मोदी को पत्र लिखकर तारीफ की है। 

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Coronavirus महामारी से बचाव के लिए उठाए कदमों के लिए सोनिया गांधी ने की पीएम मोदी की तारीफ, दिए 5 सुझाव

नई दिल्ली: कांग्रेस की अंतरिक अध्‍यक्ष सोनिया गांधी ने कोरोना वायरस संकट के बीच उठाए गए कदमों के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तारीफ की है। सोनिया गांधी ने पीएम मोदी को पत्र लिखकर तारीफ की है। इस पत्र में सोनिया गांधी ने केंद्रीय मंत्रिमंडल के फैसले का समर्थन किया है, जिसमें सांसदों के वेतन में 30 फीसद की कमी करने का फैसला लिया गया है। सोनिया गांधी ने इस पत्र में लिखा है, "यह एक सराहनीय कदम है। इस पैसे का उपयोग कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई के लिए बहुत आवश्यक है। यह समय की आवश्यकता है।"

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सोनिया गांधी ने पत्र की शुरुआत में लिखा है, ''कल टेलीफोन पर हुई बातचीत में आपने कोविड-19 से लड़ने के लिए कांग्रेस पार्टी के सुझाव देने के बारे में अनुरोध किया था। मैं इसी भावना से यह पत्र लिख रही हूं। मैं इस चुनौतीपूर्ण समय में आपके अच्छे स्वास्थ्य की कामना करती हूं।'' कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष प्रधानमंत्री को कोविड-19 से लड़ने और फिजूलखर्ची से बचने के लिए 5 सुझाव दिए हैं।

पहला, सरकार एवं सरकारी उपक्रमों द्वारा मीडिया विज्ञापनों-टेलीविज़न, प्रिंट एवं ऑनलाईन विज्ञापनों पर दो साल के लिए रोक लगा यह पैसा कोरोना वायरस से उत्पन्न हुए संकट से जूझने में लगाया जाए। केवल कोविड-19 के एडवाईज़री या स्वास्थ्य से संबंधित विज्ञापन ही इस बंदिश से बाहर रखे जाएं। केंद्र सरकार मीडिया विज्ञापनों पर हर साल लगभग 1,250 करोड़ रु. खर्च करती है। इसके अलावा सरकारी उपक्रमों एवं सरकारी कंपनियों द्वारा विज्ञापनों पर खर्च की जाने वाली सालाना राशि इससे भी अधिक है। सरकार के इस प्रयास से कोरोना वायरस द्वारा हुए अर्थव्यवस्था व समाज को होने वाले नुकसान की भरपाई में एक बड़ी राशि जुटाने में मदद मिलेगी।

 
दूसरा, 20,000 करोड़ रु. की लागत से बनाए जा रहे ‘सेंट्रल विस्टा’ ब्यूटीफिकेशन एवं कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट को स्थगित किया जाए। मौजूदा स्थिति में विलासिता पर किया जाने वाला यह खर्च व्यर्थ है। मुझे विश्वास है कि संसद मौजूदा भवन से ही अपना संपूर्ण कार्य कर सकती है। नई संसद व उसके नए कार्यालयों के निर्माण की आज की आपातकालीन स्थिति में जरूरत नहीं। ऐसे संकट के समय में इस खर्च को टाला जा सकता है। इससे बचाई गई राशि का उपयोग नए अस्पतालों व डायग्नोस्टिक सुविधाओं के निर्माण तथा अग्रिम कतार में रहकर काम कर रहे स्वास्थ्यकर्मियों को पर्सनल प्रोटेक्शन ईक्विपमेंट (‘पीपीई’) एवं बेहतर सुविधाएं प्रदान करने के लिए किया जाए।
 
तीसरा, भारत सरकार के खर्चे के बजट (वेतन, पेंशन एवं सेंट्रल सेक्टर की योजनाओं को छोड़कर) में भी इसी अनुपात में 30 प्रतिशत की कटौती की जानी चाहिए। यह 30 प्रतिशत राशि (लगभग 2.5 लाख करोड़ रु. प्रतिवर्ष) प्रवासी मजदूरों, श्रमिकों, किसानों, एमएसएमई एवं असंगठित क्षेत्र में काम करने वालों को सुरक्षा चक्र प्रदान करने के लिए आवंटित की जाए।
 
चौथा, राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों, राज्य के मंत्रियों तथा नौकरशाहों द्वारा की जाने वाली सभी विदेश यात्राओं को स्थगित किया जाए। केवल देशहित के लिए की जाने वाली आपातकालीन एवं अत्यधिक आवश्यक विदेश यात्राओं को ही प्रधानमंत्री द्वारा अनुमति दी जाए। विदेश यात्राओं पर खर्च की जाने वाली यह राशि (जो पिछले पाँच सालों में केवल प्रधानमंत्री एवं केंद्रीय मंत्रियों की विदेश यात्रा के लिए 393 करोड़ रु. है) कोरोना वायरस से लड़ाई में सार्थक तौर से उपयोग की जा सकती है।

पाँचवां, ‘पीएम केयर्स’ फंड की संपूर्ण राशि को ‘प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत फंड’ (‘पीएम-एनआरएफ’) में स्थानांतरित किया जाए। इससे इस राशि के आवंटन एवं खर्चे में एफिशियंसी, पारदर्शिता, जिम्मेदारी तथा ऑडिट सुनिश्चित हो पाएगा। जनता की सेवा के फंड के वितरण के लिए दो अलग-अलग मद बनाना मेहनत व संसाधनों की बर्बादी है। पीएम-एनआरएफ में लगभग 3800 करोड़ रु. की राशि (वित्तवर्ष 2019 के अंत तक) बिना उपयोग के पड़ी है। यह फंड तथा ‘पीएम-केयर्स’ की राशि को मिलाकर उपयोग में लाकर, समाज में हाशिए पर रहने वाले लोगों को तत्काल खाद्य सुरक्षा चक्र प्रदान किया जाए।

पत्र के आखिर में सोनिया ने लिखा है, ''देश के सामने पैदा हुईं कोविड-19 की चुनौतियों से निपटने में हमारा पूरा सहयोग आपके साथ है।''

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