नई दिल्ली: केंद्र द्वारा गठित समीक्षा समिति ने जम्मू-कश्मीर में पैलेट गन की जगह साउंड कैनन, पैपर शॉटगन और मिर्च पाउडर ग्रेनेड के इस्तेमाल की सलाह दी है। सैन्य कमांडर जनरल डीएस हुड्डा ने सोमवार को समिति में ये सलाह दी। उनका कहना था कि पैटल गन के कारण बड़ी संख्या में लोग घायल होते हैं। इससे कई लोगों की आंखों की रोशनी चली जाती है। इसके बाद समिति ने यह निर्णय किया कि पैटल गन की बजाय ऐसे हथियारों का इस्तेमाल किया जाएगा जो कम घातक हो और उससे लोगों को नुकसान ना पहुंचे।
आपको बता दें कि हिज्बुल मुजाहिदीन के आतंकी कमांडर बुरहान वानी के मारे के बाद सुरक्षा बल और प्रदर्शनकारियों के बीच अब तक सैकड़ों हिंसक झड़पें हो चुकी हैं। कई दफा भीड़ को तितर-बितर करने के लिए सुरक्षा बल पैलेट गन का इस्तेमाल करते हैं। इसके इस्तेमाल से हजारों घायल हो गए हैं। बताया जा रहा है कि जिन सैकड़ों लोगों को आंख में इसके छर्रे लगे हैं, उनकी आंखों से अब दिखाई नहीं पड़ रहा है। दिल्ली से गए आंखो के सर्जन डॉक्टर और स्थानीय डॉक्टरों ने कइयों के रेटिना के ऑपरेशन किए हैं और अब सबको इंतजार है उनकी आंखों की रोशनी आने का।
क्या है पैलेट गन
कई बार प्रदर्शन के दौरान भीड़ को तितर-बितर करने के लिए सुरक्षा बल पैलेट गन का इस्तेमाल करते हैं। इसके इस्तेमाल से बहुत से लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। यह नॉन लीथल हथियार होता है यानी इन हथियारो से किसी की जान नहीं जाती है। पैलेट गन में कई तरह के कारतूस इस्तेमाल होते हैं। कारतूस 5 से 12 के रेंज में होते हैं, पांच को सबसे तेज़ और ख़तरनाक माना जाता है। इसका असर काफ़ी दूर तक होता है। पैलेट गन से छोटे लौहे के बॉल फायर किए जाते हैं। पेलेट गन, आम तौर से शिकार के लिए इस्तेमाल की जाती हैं, क्योंकि इसके छर्रे चारों तरफ बिखरते हैं और शिकारी को अपने लक्ष्य पर निशाना साधने में आसानी होती है। कशमीर में जो लोग भी पैलेट गन से घायल होते हैं उन्हें इलाज के लिए बाहर भेजा जाता है। भीड़ से निपटने के लिए पैलेट गन का इस्तेमाल दुनिया के कई देशों में हो रहा है। लेकिन अब इसेक विरोध में अब आवाजें उठने लगी हैं।