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गैर-मुस्लिम से निकाह के लिए लेनी होगी वक्फ बोर्ड से इजाजत, मौलानाओं का रजिस्ट्रेशन भी हुआ अनिवार्य

 Published : Jul 07, 2026 05:04 pm IST,  Updated : Jul 07, 2026 05:37 pm IST

छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड के नए नियमों के मुताबिक अब बिना परिजनों की सहमति के अंतर-धार्मिक निकाह नहीं हो पाएगा। इसके साथ ही मौलानाओं का वक्फ बोर्ड में रजिस्ट्रेशन भी अनिवार्य कर दिया गया है।

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छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज Image Source : REPORTER INPUT

रायपुर: छत्तीसगढ़ में फर्जी निकाह, पहचान छुपाकर शादी करने और खासतौर से आदिवासी क्षेत्रों में संपत्ति के लालच में होने वाले विवाह की शिकायतों पर छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड ने बेहद सख्त कदम उठाया है। वक्फ बोर्ड से रजिस्टर्ड मौलाना ही अब प्रदेश में निकाह करा पाएंगे। साथ ही अंतर-धार्मिक निकाह की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।

अगस्त 2026 से नए नियम लागू होंगे

दरअसल, राज्य में फर्जी निकाह रोकने और प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए वक्फ बोर्ड अगस्त 2026 से नए नियम लागू करने जा रहा है। छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज का कहना है कि मौजूदा समय में निकाह का कोई केंद्रीय रिकॉर्ड न होने के कारण भविष्य में पहचान, वैवाहिक स्थिति और कानूनी दस्तावेजों से जुड़े गंभीर विवाद सामने आते हैं। इसे रोकने के लिए वक्फ बोर्ड ने कदम उठाया है। अब राज्य के सभी निकाह पढ़ाने वाले मौलानाओं का वक्फ बोर्ड में रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिया गया है। भविष्य में सिर्फ रजिस्टर्ड मौलाना ही निकाह करा सकेंगे। अगर कोई बिना रजिस्ट्रेशन या नियमों का उल्लंघन कर निकाह कराता है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

हिंदी, अंग्रेजी और उर्दू में जारी होगा निकाहनामा: वक्फ बोर्ड अध्यक्ष 

वक़्फ़ बोर्ड के अध्यक्ष सलीम राज ने कहा अब निकाहनामा हिंदी, अंग्रेजी और उर्दू, तीनों भाषाओं में जारी होगा। नए फॉर्मेट में दूल्हा-दुल्हन का आधार कार्ड और निकाह पढ़ाने वाले मौलाना का नाम व मोबाइल नंबर दर्ज करना अनिवार्य होगा। साथ ही निर्देश दिए गए हैं कि मौलाना केवल मुस्लिम जोड़ों का ही निकाह कराएंगे। यदि किसी गैर-मुस्लिम पक्ष का धर्म परिवर्तन नहीं हुआ है, तो पहले कोर्ट मैरिज करनी होगी। सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था से पारदर्शिता बढ़ेगी और फर्जी निकाह पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।”

परिजनों की सहमति और वक्फ बोर्ड की मंजूरी अनिवार्य

नए नियमों के मुताबिक अगर कोई मुसलमान किसी गैर-मुसलमान से निकाह करना चाहता है तो ऐसी स्थिति में उसे वक्फ बोर्ड से इजाजत लेनी होगी। इसके लिए दोनों पक्षों की आपसी सहमति, पहचान पत्र और दस्तावेजों की गहन जांच की जाएगी। इसमें सबसे सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि दूसरे धर्म की लड़की के परिजनों की अनुमति के बिना निकाह नहीं हो सकेगा। अगर लड़की के परिजनों की सहमति नहीं है, तो मौलाना निकाह नहीं पढ़ा पाएंगे।

आदिवासी महिलाओं को टारगेट करने की शिकायतों पर एक्शन

बता दें कि वक्फ बोर्ड को पिछले कुछ समय से ऐसी शिकायतें मिल रही थीं कि छत्तीसगढ़ के आदिवासी इलाकों में कुछ लोग संपत्ति हड़पने या अन्य स्वार्थों के चलते स्थानीय आदिवासी महिलाओं से निकाह कर रहे हैं। इस नए नियम से ऐसे फर्जी मामलों पर पूरी तरह लगाम लग सकेगी। अब हर निकाहनामे का रिकॉर्ड वक्फ बोर्ड में सुरक्षित रहेगा और डिजिटल सर्टिफिकेट की रसीद सिर्फ वक्फ बोर्ड से ही जारी होगी।

वक्फ बोर्ड निकाह में दखल नहीं दे: काजी मौलाना अशरफ जिलानी

वहीं क़ाज़ी मौलाना अशरफ़ जिलानी ने कहा है कि वक्फ बोर्ड निकाह में दखल न दे। उन्होंने दावा किया कि हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार वक्फ बोर्ड धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं कर सकता। साथ ही निकाह के लिए कलेक्टर के रजिस्ट्रेशन को पर्याप्त बताया और लव जिहाद के मुद्दे पर भी सवाल उठाए।

रिपोर्ट-सिकंदर खान, रायपुर

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