नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को महाराष्ट्र सरकार को दो दिन के अंदर आठ डांस बार को लाइसेंस देने का निर्देश दिया और उनसे यह शपथपत्र देने को कहा कि वे डांस क्षेत्र के पास आपराधिक पृष्ठभूमि के कर्मचारी नहीं रखेंगे। न्यायालय ने कहा, यह निर्देश दिया गया है कि उन वादियों द्वारा एक शपथपत्र दिया जाए, जिन्होंने यह अर्जी दाखिल की है कि वे लोग बार और डांस क्षेत्र में ऐसे कर्मचारियों को नियुक्त नहीं करेंगे जिनके नाम का जिक्र राज्य के दिए हलफनामे में आया हो।
न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति शिव कीर्ति सिंह की सदस्यता वाली एक पीठ ने कहा, शपथपत्र बुधवार तक जारी किया जाए और लाइसेंस गुरुवार तक जारी किया जाए।
महाराष्ट्र सरकार ने अदालत में एक हलफनामा दाखिल कर पीठ को बताया कि उसने आठ डांस बार को लाइसेंस जारी नहीं किया क्योंकि उसने पाया कि उनके कुछ कर्मचारियों की आपराधिक पृष्ठभूमि है।इंडियन होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता जयंत भूषण ने कहा कि अब तक एक भी लाइसेंस नहीं जारी किया गया है। उन्होंने दलील दी कि बारों के कुछ कर्मचारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है, उन्हें इस आधार पर लाइसेंस नहीं जारी किया जा रहा कि उनकी आपराधिक पृष्ठभूमि है। उन्होंने कहा कि जब तक किसी अपराध को लेकर किसी व्यक्ति को दोषी नहीं ठहरा दिया जाता तब तक उसे अपराधी नहीं करार दिया जा सकता। लाइसेंस में किसी न किसी बहाने देर की जा रही है।
डांस स्टेज से लगे रेलिंग (घेराबंदी) की ऊंचाई बढ़ाने के मुद्दे पर भूषण ने पीठ को बताया कि ऐसा कमियों को दूर किया जा रहा है। सुनवाई के दौरान एक वकील ने कहा कि डांसरों की आपराधिक पृष्ठभूमि पर भी गौर किया जाना चाहिए और उन पर शर्ते लगाई जानी चाहिए। न्यायालय ने इस पर सख्त ऐतराज जताया और कहा, क्या आप हमें यह बताने की कोशिश कर रहे हैं कि वे अपराधी हैं?
दोषी ठहराए जाने पर कोई भी व्यक्ति आजीविका अर्जित नहीं कर सकता। हम महिलाओं की गरिमा बचाना चाहते हैं। पीठ ने कहा कि आप उनकी आजीविका के साधनों को छीन लेना चाहते हैं। महिलाओं की गरिमा बरकरार रखनी होगी और किसी भी तरह की अश्लीलता की इजाजत नहीं दी जाएगी। बहरहाल, न्यायालय ने मामले को आगे की सुनवाई के वास्ते 13 मई के लिए मुल्तवी कर दिया।