पणजी: खाओ, पियो और मौज करो- यही मूल मन्त्र है गोवा कार्निवाल को उत्साह से मनाने का। कहते हैं पुर्तगालियों ने सोलहवीं शताब्दी में गोवा में कार्निवाल मनाने की शुरुवात की। वैसे तो गोवा साल में कई कार्निवाल मनाता है, जैसे दिसंबर में पूरा गोवा क्रिसमस कार्निवाल के रंग में रंग जाता है। वैसे ही फरवरी के महीने में गोवा वीवा कार्निवाल मनाता है।

इन दिनों ईसाई समुदाय 40 दिन के लिए किसी भी प्रकार के उत्सव से दूर रहता है और इस दौरान मांस मदिरा का भी सेवन नहीं करता है। जब चालीस दिन पूरे होते हैं तो किंग मोमो जिनका सम्बन्ध ग्रीक भगवान मोमोस से बताया जाता है और जिन्हें हास्य का देवता भी कहा जाता है, वह सड़कों पर निकल कर अपनी प्यारी जनता को ख़ुशी मनाने, खाने-पीने का फ़रमान सुनाते हैं और इस तरह 4 दिन तक चलने वाले वीवा कार्निवाल की शुरुआत पंजिम शहर से होती है।

इस कार्निवाल परेड में लोग बड़े उत्साह से भाग लेते हैं। बड़ी बड़ी झांकियां सजाई जाती हैं। यह उत्सव है लोगों का उनके उत्साह का। छोटे-छोटे गांवों से लेकर बड़े शहरों तक के लोग इस कार्निवाल में शिरकत करते हैं।

पूरे शहर को दुल्हन की तरह कार्निवाल के लिए सजाया जाता है। हर सड़क, हर गली, हर चौराहा, हर पार्क रंगीन मुखौटों और झालरों से सज जाता है।

इस कार्निवाल में जहां युवा अलग-अलग डांस ग्रुप्स में परेड में नाचते और जोश से भरे दिखाई देते हैं वहीँ बड़ी उम्र के लोग अलग-अलग रंगों वाले रूपों में सब का मनोरंजन करते हैं।

इस कार्निवाल में कुछ झांकियां पुर्तुगाली संस्कृति की छठा बिखेरती दिखती हैं तो कुछ शुद्ध गोवा की ग्रामीण संस्कृति के दर्शन भी करवाती हैं।

इस कार्निवाल की ख़ासियत यह थी कि अधिकतर झांकियां किसी न किसी सन्देश को फ़ैलाने का काम कर रही थीं। जैसे आतंकवाद से मुक्ति, कैश लैस ट्रांज़ैक्शन, सेव द नेचर, चाइल्ड एब्यूज़ आदि।

यह कार्निवाल दोपहर 3 बजे से शुरू होकर शाम 6 बजे तक चलता है। एक के पीछे एक खूबसूरत झांकियां और डान्सर्स सबको बांधे रखते हैं।

पंजिम से शुरू होकर यह कार्निवाल गोवा के विभिन्न गांवों और शहरों से गुज़र कर वापस पंजिम पहुँचता है। जहां चौथे दिन प्रसिद्ध रेड व ब्लैक डांस नाईट का आयोजन किया जाता है जिसमें युवा ख़ास काले और लाल रंग के परिधानों में ताल से ताल मिलाते हुए इस उत्सव का ग्रांड फिनाले मनाते हैं।

वीवा कार्निवाल का एक और मुख्य आकर्षण है गोवा का पारंपरिक खाना। वीवा कार्निवाल के दौरान सैलानियों को गोवा के पारंपरिक सी फ़ूड को चखने का मौक़ा गोवा की स्ट्रीट पर मिलता है।

वीवा कार्निवाल देशी विदेशी सैलानियों के लिए आकर्षण का मुख्य केन्द्र है। इस आयोजन को सफल बनाने में गोवा की जनता महीना भर पहले से तैयारियों में जुट जाती है वहीँ गोवा का लोकल प्रशासन व पर्यटन विभाग आने वाले सैलानियों के लिए आयोजन को बेहतर बनाने में कोई कमी नहीं छोड़ते। इस आयोजन के ज़रिए गोवा की संस्कृति से नज़दीक से रूबरू होने का मौक़ा मिलता है।
डॉक्टर कायनात काजी वैसे तो फटॉग्रफर, ट्रैवल राइटर और ब्लॉगर हैं, लेकिन खुद को वह सोलो फीमेल ट्रैवलर के रूप में ही पेश करती हैं। यायावरी उनका जुनून है और फटॉग्रफी उनका शौक। ब्लॉगिंग के लिए उन्हें देश के एक प्रतिष्ठित न्यूज चैनल द्वारा बेस्ट हिंदी ब्लॉगर का सम्मान भी दिया जा चुका है। हिंदी साहित्य में PHD कर चुकीं कायनात एक प्रफेशनल फटॉग्रफर हैं। कायनात राहगिरी (rahagiri.com) नाम से हिंदी का पहला ट्रैवल फटॉग्रफी ब्लॉग चलाती हैं।