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"शत्रु के दुस्साहस का मुंहतोड़ जवाब देने को तैयार IAF", वायुसेना प्रमुख की दो टूक

IAF प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए पी सिंह ने कहा कि किसी भी आपात स्थिति में भारत विशेष रूप से भारतीय वायुसेना दो मोर्चों पर युद्ध लड़ने के लिए मुस्तैद है।

Edited By: Malaika Imam @MalaikaImam1
Published : Dec 10, 2025 11:32 pm IST, Updated : Dec 10, 2025 11:34 pm IST
भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए पी सिंह- India TV Hindi
Image Source : FILE (PTI) भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए पी सिंह

भारतीय वायुसेना (IAF) प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए पी सिंह ने बुधवार को कहा कि भारतीय वायुसेना किसी भी शत्रु देश के दुस्साहस का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि किसी भी आपात स्थिति में भारत, विशेष रूप से भारतीय वायुसेना, दो मोर्चों पर युद्ध लड़ने के लिए मुस्तैद है। यह बात उन्होंने वर्ष 1971 में पाकिस्तान पर भारत की ऐतिहासिक विजय के उपलक्ष्य में मनाए जा रहे 'विजय दिवस' के अवसर पर आयोजित हवाई प्रदर्शन में भाग लेते हुए कही।

एयर चीफ मार्शल सिंह ने डिब्रूगढ़ में पत्रकारों से बातचीत करते हुए बताया कि भारतीय वायुसेना पिछले अनुभवों के आधार पर अपनी 'स्टील्थ' क्षमता और रणनीति में लगातार सुधार कर रही है। उन्होंने कहा, "अगर कोई शत्रु राष्ट्र किसी भी तरह का दुस्साहस करता है, तो हम उसे करारा जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।"

1971 युद्ध में IAF का योगदान

वायुसेना प्रमुख ने 1971 के युद्ध में भारतीय वायुसेना के महत्वपूर्ण योगदान को याद किया, जिसने भारत की जीत में निर्णायक भूमिका निभाई। उन्होंने कहा, "भारतीय वायुसेना ने जिस दृढ़ता से डटकर अपना काम किया, चाहे वह नवंबर में दिन के समय चलाए गए अभियान हों, अंतिम प्रहार हों या बांग्लादेश में राज्यपाल भवन पर हमला, उसने निर्णायक रूप से युद्ध का अंत किया।" उन्होंने कहा कि भारतीय सशस्त्र बलों की उन 13 दिनों की त्वरित कार्रवाई में पाकिस्तान को दबाव में झुकते और युद्धविराम की अपील करते देखा गया।

संयुक्त कार्यकुशलता की बड़ी उपलब्धि

एयर चीफ मार्शल सिंह ने 1971 के युद्ध को संयुक्त कार्यकुशलता की बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि नदी पार करने या हवाई मार्ग से सामान गिराने जैसे नियोजित अभियान सेना और वायुसेना के बीच घनिष्ठ समन्वय के बिना संभव नहीं होते। उन्होंने कहा, "जिस तरह नौसेना समेत तीनों सेनाओं ने सक्रिय भागीदारी के साथ मिलकर काम किया, उससे यह बहुत ही महत्वपूर्ण सबक मिला कि संयुक्त अभियान युद्ध में बड़े पैमाने पर जीत दिला सकते हैं।"

इससे पहले दिन में भारतीय वायुसेना ने डिब्रूगढ़ के मोहनबारी वायुसेना स्टेशन पर एक शानदार हवाई प्रदर्शन के साथ 1971 के युद्ध में अपनी ऐतिहासिक जीत का उत्सव मनाया। पूर्वी वायु कमान द्वारा आयोजित दिन भर के समारोह ने आम जनता, सैन्य और नागरिक क्षेत्र के गणमान्य व्यक्तियों, वायुसेना के अनुभवी वरिष्ठों और सैकड़ों उत्साही स्कूली बच्चों को मंत्रमुग्ध कर दिया। अधिकारियों ने बताया कि हवाई प्रदर्शन में भारतीय वायुसेना के कुछ सबसे शक्तिशाली विमान शामिल थे, जिनमें सुखोई एसयू-30 लड़ाकू विमान, डोर्नियर डीओ-228 निगरानी विमान, एंटोनोव एएन-32 परिवहन विमान और चिनूक और एमआई-17 हेलीकॉप्टर शामिल थे। (इनपुट- भाषा)

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