विजय दिवस को भारतीय सेना के शौर्य के लिए जाना जाता है। साल 1971 में भारतीय सेना ने पाकिस्तान को घुटने पर आने के लिए मजबूर कर दिया था।
युद्ध सिर्फ बॉर्डर पर नहीं, समाज के हर भाग में लड़ा जाता है। देश के आम नागरिकों का आत्मबल और छोटे-छोटे योगदान ही फौज की सबसे बड़ी ताकत बन सकते हैं। इस खबर में समझिए ऐसा कैसे मुमकिन है।
1971 के युद्ध में भारतीय सेना ने पाकिस्तान पर ऐतिहासिक एवं निर्णायक जीत हासिल की थी। इस जीत की स्मृतियां आज भी भारतीय सेना के पास विभिन्न वॉर ट्रॉफियों के रूप में सुरक्षित हैं, जो उस गौरवशाली क्षण की गवाही देती हैं।
बसंतर के युद्ध को भारतीय सैन्य इतिहास की सबसे भीषण टैंक लड़ाइयों में से एक माना जाता है। इस युद्ध के दौरान अरुण खेत्रपाल ने अपने अदम्य साहस और बलिदान से युद्ध का रुख बदल दिया था।
Vijay Diwas के मौके पर Gen-Z से सीधा सवाल हुआ- भारतीय सेना उनके लिए कितनी अहम है और देशभक्ति का आज के दौर में असली मतलब क्या है। पढ़िए दिल्ली यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स ने सेना के सम्मान और अपने रोल पर क्या बात की।
Vijay Diwas 2025 Wishes Deshbhakti Sandesh: आज यानी 16 दिसबंर के मौके पर विजय दिवस मनाया जा रहा है। ऐसे में इस खास मौके पर देश के वीर जवानों को नमन करने के लिए यहां से देशभक्ति शायरी, मैसेज, कोट्स शेयर कर सकते हैं।
Vijay Diwas 2025: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, पीएम मोदी, अमित शाह ने विजय दिवस पर सैनिकों के बलिदान और शौर्य को नमन किया। 1971 में आज के ही दिन भारतीय सेना पाकिस्तान को करारी शिकस्त दी थी।
विजय दिवस पर 1971 की निर्णायक जीत और तब से लेकर आज के दौर की हाई-टेक जंग तक भारतीय सेना के ऐतिहासिक सफर, भविष्य की सबसे बड़ी सैन्य चुनौतियों यानी ड्रोन युद्ध, साइबर और इन्फॉर्मेंशन वॉर के बारे में विस्तार से जानिए।
विजय दिवस के अवसर पर सेना प्रमुख के आवास पर बने व्यंजनों के नाम सिंदूरी संदेश, आकाश, बोफोर्स दिए गए हैं। इन्हीं हथियार प्रणालियों ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अहम भूमिका निभाई थी।
IAF प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए पी सिंह ने कहा कि किसी भी आपात स्थिति में भारत विशेष रूप से भारतीय वायुसेना दो मोर्चों पर युद्ध लड़ने के लिए मुस्तैद है।
बांग्लादेश के विजय दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक पोस्ट ने ढाका में खलबली मचा दी है। पीएम मोदी के ट्वीट से बांग्लादेश की अंतरिम सरकार को तगड़ी मिर्ची लगी है।
भारत की सेना अमेरिका, रूस और चीन के बाद दुनिया की चौथी सबसे बड़ी सेना है। भारत के पास कई ऐसे घातक हथियार और फाइटर जेट्स हैं जो पल भर में दुश्मन को धूल चटा सकते हैं।
प्रधानमंत्री और रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने आज 1971 जंग के वीरों श्रद्धांजलि दी है। इसके साथ ही इंडियन आर्मी ने 1971 की जंग से जुड़ा एक वीडियो भी शेयर किया है।
1971 की जंग भारत और बांग्लादेश दोनों के लिए खास है। इस जंग में भारतीय सेना ने पाकिस्तान के 93000 सैनिकों को सरेंडर कराया था, जो द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सबसे बड़ा आत्मसमर्पण था।
पूरा राष्ट्र आज 1971 युद्ध के नायकों को नमन कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस युद्ध के वीर जवानों को श्रद्धांजलि दी और कहा कि उनकी वीरता राष्ट्र के गौरव का स्रोत है।
1971 की वॉर के योद्धा रिटायर्ड कर्नल वीएन थापर ने इंडिया टीवी से खास बातचीत में पाकिस्तान के आत्मसमर्पण करने की शुरू से लेकर आखिर तक की एक-एक घटना का विस्तार से विवरण दिया।
इसी दिन 1971 में भारत ने पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब दिया था। आज के ही दिन भारत ने पाकिस्तान पर जीत का जश्न मानाया था। इसके साथ ही आज ही बांग्लादेश अपनी आजादी की 50वीं वर्षगांठ भी मना रहा है। दरअसल इस युद्ध की कहानी का केंद्र बिंदु आज का बांग्लादेश ही है, जो कभी पश्चिमी पाकिस्तान हुआ करता था। 16 दिसंबर 1971 से बांग्लादेश इस दिन को अपनी आजादी के रूप में मनाता है।
22वें कारगिल विजय दिवस के अवसर पर, भारतीय सशस्त्र बलों की जीत के उपलक्ष्य में और हमारे शहीदों के सर्वोच्च बलिदान को श्रद्धांजलि देने के लिए मुंबई के कोलाबा में शहीद स्मारक पर एक पुष्पांजलि समारोह आयोजित किया गया था।
Captain Vijayant Thapar दो राजपूताना राइफल्स के जांबाज़ अफसर थे। कारगिल युद्ध के दौरान उन्होंने तोलोलिंग के बंकर पर कब्ज़ा कर उन्होंने भारत को पहली जीत दिलवाई थी। जानिए उनकी वीरता की कहानी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के 50 साल पूरा होने के अवसर पर बुधवार को राजधानी दिल्ली स्थित राष्ट्रीय समर स्मारक की अमर ज्योति से ‘‘स्वर्णिम विजय मशाल’’ को प्रज्ज्वलित किया।
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