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Vijay Diwas: भारतीय सैनिकों की बहादुरी का वो किस्सा, जिसके आगे पाकिस्तान ने टेक दिए घुटने; पूरी दुनिया ने देखा दम

विजय दिवस को भारतीय सेना के शौर्य के लिए जाना जाता है। साल 1971 में भारतीय सेना ने पाकिस्तान को घुटने पर आने के लिए मजबूर कर दिया था।

Edited By: Amar Deep @amardeepmau
Published : Dec 16, 2025 07:45 pm IST, Updated : Dec 16, 2025 07:45 pm IST
भारतीय सेना के आगे पाकिस्तान ने किया था सरेंडर। - India TV Hindi
Image Source : FILE भारतीय सेना के आगे पाकिस्तान ने किया था सरेंडर।

आज पूरा देश विजय दिवस मना रहा है। यह दिन 1971 जंग की निर्णायक जीत का प्रतीक है कि कैसे भारतीय सेना ने पाकिस्तानी सेना को धूल चटा दी और ईस्ट पाकिस्तान को जुल्मों से आजादी दिलाई। आज 16 दिसंबर का दिन भारत के साथ-साथ बांग्लादेश के लिए भी खास है। आज ही के दिन बांग्लादेश का जन्म हुआ था। यह दिन भारतीय सशस्त्र बलों के बलिदान को श्रद्धांजलि है, जिन्होंने इतिहास की सबसे निर्णायक जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसी युद्ध का परिणाम ये हुआ कि पाकिस्तान दो हिस्सों में बंट गया और बांग्लादेश का उदय हुआ।

बांग्लादेश के उदय की कहानी

साल 1970-71 में पूर्वी पाकिस्तान में जुल्म और खुलेआम नरसंहार बढ़ता जा रहा था। उस समय पाकिस्तानी जनरल याह्या खान ने अपनी दमनकारी सैन्य शासन के जरिए पूर्वी पाकिस्तान में आम लोगों का नरसंहार करना चालू कर रखा था। तब शेख मुजीबुर रहमान ने आमजन को लड़ने के लिए प्रेरित किया और मुक्ति वाहिनी सेना बनाई। उन्होंने भारत से मदद मांगी। इसके बाद पूर्वी पाकिस्तान के लोगों को पाकिस्तान के क्रूरता से बचाने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भारतीय सेना को जंग में जाने की इजाजत दी। भारत ने पूर्वी पाकिस्तान में बांग्लादेश की स्वतंत्रता संग्राम में बंगाली राष्ट्रवाद ग्रुप का समर्थन करते हुए पाकिस्तान के खिलाफ जंग लड़ी। इस जंग में आखिरकार पाकिस्तान को मुंह की खानी पड़ी और बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा। 

भारतीय सैनिकों ने दिखाई बहादुरी

बांग्लादेश के उदय से पहले भारतीय सेना ने 4 दिसंबर 1971 को ऑपरेशन ट्राइडेंट शुरू किया। इस जंग में भारतीय सेना ने पाकिस्तानी सेना को मुंह तोड़ जवाब दिया और 16 दिसंबर 1971 को नए राष्ट्र के रूप में बांग्लादेश का जन्म हुआ। इस जंग में भारतीय सेना ने 16 दिसंबर 1971 को पाकिस्तानी सेना के कमांडर जनरल आमिर अब्दुल्ला खान नियाज़ी को झुकने पर मजबूर कर दिया। इसके बाद कमांडर जनरल ने औपचारिक रूप से भारत और बांग्लादेश की मुक्ति वाहिनी की संयुक्त सेना के सामने सरेंडर कर दिया। इस दौरान करीबन 93,000 पाकिस्तानी सैनिकों ने आत्मसमर्पण किया था, जो द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सबसे बड़ा सैन्य आत्मसमर्पण था। भारत ने 93,000 हजार पाकिस्तानियों को हथियार समेत सरेंडर कराए और दुनिया के सामने सेना का दम दिखाया।

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