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अंकिता भंडारी केस: उत्तराखंड में कांग्रेस का बंद जमीनी हकीकत में फेल, व्यापारियों ने खड़े किए सवाल

Edited By: Akash Mishra @Akash25100607
Published : Jan 12, 2026 03:20 pm IST, Updated : Jan 12, 2026 03:40 pm IST

उत्तराखंड में कांग्रेस का बंद नहीं चला। इस बंद को आम जनता का साथ नहीं मिला। व्यापारियों ने इसका विरोध किया और सवाल खड़े किए।

अंकिता भंडारी- India TV Hindi
Image Source : PTI अंकिता भंडारी

अंकिता भंडारी के नाम पर आज उत्तराखंड की सड़कों पर जो दिखा, वो जनआक्रोश नहीं बल्कि राजनीति थी। कांग्रेस द्वारा बुलाया गया उत्तराखंड बंद पूरी तरह असफल रहा। न जनता साथ आई, न व्यापारियों ने समर्थन दिया और न ही जमीनी हकीकत कांग्रेस के दावों के साथ खड़ी दिखी। कांग्रेस ने इस बंद को न्याय की आवाज बताया, लेकिन सवाल यही है कि जब सीबीआई जांच की संस्तुति पहले ही दी जा चुकी थी, तो फिर बंद किस बात का? 

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा अंकिता भंडारी के माता-पिता के अनुरोध पर सीबीआई जांच की संस्तुति दिए जाने के बाद, कई सामाजिक और व्यापारिक संगठनों ने साफ कर दिया था कि अब बंद का कोई औचित्य नहीं बचता। संगठनों का स्पष्ट मत था कि जांच की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और अब सड़कों पर दबाव की राजनीति करना गलत है।

व्यापारियों और स्थानीय लोगों ने किया खुलकर विरोध 

बंद के दिन जमीनी तस्वीरें कुछ और ही कहानी कहती नजर आईं। देहरादून, हल्द्वानी, हरिद्वार, अल्मोड़ा, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली और अन्य शहरों में अधिकांश बाजार खुले रहे। जनजीवन सामान्य रहा और आम लोग अपने रोजमर्रा के काम में जुटे दिखे। हालांकि, इसी बीच कई जगहों से ऐसी खबरें सामने आईं कि कांग्रेस कार्यकर्ता जबरदस्ती दुकानें बंद कराने के लिए पहुंचे। इसका व्यापारियों और स्थानीय लोगों ने खुलकर विरोध किया। कई इलाकों में दुकानदारों ने जानबूझकर अपनी दुकानें खोलीं और कहा- अगर न्याय की बात है तो सरकार से सवाल कीजिए, जनता को परेशान मत कीजिए।

बंद समर्थकों और व्यापारियों के बीच नोकझोंक

कुछ स्थानों पर हालात इतने तल्ख हुए कि बंद समर्थकों और व्यापारियों के बीच नोकझोंक की खबरें भी आईं। कांग्रेस के दावे और जमीनी हकीकत के बीच साफ फर्क नजर आया। जहां कांग्रेस इसे सफल बंद बता रही थी, वहीं ज्यादातर संगठन और आम जनता इससे खुद को अलग करती दिखी। यही कारण रहा कि यह बंद राज्यव्यापी जनांदोलन बनने के बजाय राजनीतिक प्रदर्शन तक सिमटकर रह गया।

बता दें कि हाल में ही सीएम पुष्कर सिंह धामी ने अंकिता भंडारी केस में CBI जांच की सिफारिश की है। सीएम धामी ने कहा था कि यह पूरे केस में इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि राज्य सरकार ने शुरू से लेकर अंत तक निष्पक्षता, पारदर्शिता और दृढ़ता के साथ न्याय सुनिश्चित किया है।

पूरा मामला 

बता दें कि पौड़ी जिले के यमकेश्वर में वनतारा रिजॉर्ट में 19 साल की अंकिता भंडारी रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम करती थी। वह 18-19 सितंबर 2022 को अचानक गायब हो गई थी, जिसके बाद उसकी तलाश शुरू हुई थी। अंकिता की गुमशुदगी के मामले में 23 सितंबर को तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने जब पूछताछ की तो उन्होंने हत्या की बात स्वीकार कर ली थी। वहीं, आरोपियों की निशानदेही पर ही अंकिता का शव 24 सिंतबर को चील नहर से बरामद किया गया था। 

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