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भारत ने बॉर्डर पर किस तरह का बदलाव किया, कितनी सड़कें, सुरंगें और पुल बने? BRO के DG ने दी पूरी जानकारी

Reported By : Manish Prasad Edited By : Subhash Kumar Published : Aug 22, 2025 09:11 pm IST, Updated : Aug 22, 2025 09:27 pm IST

भारत ने बीते कुछ सालों में बॉर्डर पर बड़े स्तर पर बदलाव किए हैं। BRO के DG लेफ्टिनेंट जनरल रघु श्रीनिवासन ने सीमा पर बनाए गए सड़कों, सुरंगों और पुल आदि के बारे में जानकारी दी है।

BRO DG Lt Gen Raghu Shrinivasan- India TV Hindi
Image Source : REPORTER लेफ्टिनेंट जनरल रघु श्रीनिवासन से बातचीत।

भारत सरकार देश की सीमाओं पर लगातार विकास कार्य को तेजी से पूरी करवा रही है। चाहे पाकिस्तान से लगी सीमा हो या फिर LAC, बॉर्डर रोड आर्गेनाइजेशन (BRO) ने सीमाओं पर बड़े स्तर पर सड़कों, सुरंगों और पुल का तेजी से निर्माण पूरा किया है। BRO के डीजी लेफ्टिनेंट जनरल रघु श्रीनिवासन ने India TV के साथ बातचीत में विस्तार से जानकारी दी है।

प्रश्न 1. बॉर्डर पर किस प्रकार का बदलाव आया है, विशेष रूप से लाइन ऑफ़ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर? कितनी सड़कें, कितनी सुरंगें और कितने पुल अब तक बनाए गए हैं?

उत्तर- पिछले एक दशक में भारत की सीमा संरचना में निर्णायक बदलाव आया है। अब ध्यान ऑल वेदर कनेक्टिविटी (All-weather connectivity) पर है, जिससे सबसे दूरस्थ पोस्ट और गाँव भी पूरे वर्ष सुलभ हो गए हैं। कई क्षेत्रों में वैकल्पिक मार्ग विकसित किए गए हैं, जैसे निमू-पदम-दर्चा सड़क (Nimmu-Padum-Darcha Road), जो लद्दाख को एक अतिरिक्त कनेक्टिविटी (Connectivity) देता है। पहले की सिंगल लेन ट्रैक्स (Single-lane tracks) अब डबल लेन सड़कों (Double-lane roads) में बदले जा चुके हैं और पुल अब क्लास 70R लोड स्पेसिफिकेशन (Load specification) पर बनाए जा रहे हैं, ताकि भारी सैन्य उपकरण भी आसानी से पहुँच सकें। अरुणाचल प्रदेश का मागो-चुना सड़क (Mago-Chuna Road) और उत्तराखंड में गुनजी-कुट्टी-जोलिंगकोंग सड़क (Gunji-Kutti-Jolingkong Road) जैसे प्रोजेक्ट सीमावर्ती गाँवों को देश की मुख्यधारा से जोड़ रहे हैं और रिवर्स माइग्रेशन (Reverse migration) को बढ़ावा दे रहे हैं। साथ ही, सीमा तक सुरंगें बनाई जा रही हैं, जिससे यात्रा का समय घटा है और सुरक्षा मज़बूत हुई है। अब तो हेलिपैड (Helipads) और एयरफील्ड (Airfields) भी वहाँ बनाए जा रहे हैं, जहाँ पहले इसकी कल्पना भी कठिन थी। कुल मिलाकर सीमाएँ पहले से कहीं अधिक जुड़ी हुई, सुरक्षित और सामरिक दृष्टि से मज़बूत हो चुकी हैं।

किस प्रकार पूरी तरह बदल दिया है?

उत्तर- पिछले दस वर्षों में BRO का बजट (Budget) अभूतपूर्व रूप से बढ़ा है। 2014-15 में जहाँ बजट ₹4,029 करोड़ था, वहीं 2024-25 में यह बढ़कर ₹16,690 करोड़ हो गया और 2025-26 के लिए ₹18,700 करोड़ की योजना है। इस वित्तीय सहयोग से BRO ने 2024-25 में ही 1,125 किलोमीटर सड़कें (Roads) पूरी कर लीं और इस वर्ष का लक्ष्य 1,500 किलोमीटर है। बढ़ते बजट से संगठन को नई तकनीक (Technology), हाई परफ़ॉर्मेंस मशीनरी (High-performance machinery) और आधुनिक टनलिंग (Tunneling) व फ़ास्टर ब्रिज-लॉन्चिंग (Faster bridge-launching) सुविधाएँ मिली हैं। डीपीआर (DPR) तैयार करने की प्रक्रिया तेज़ हुई है और तकनीक के बेहतर उपयोग से काम की गति और गुणवत्ता दोनों बढ़ी हैं। यह सिर्फ़ धनराशि नहीं है, बल्कि सीधा असर दिखता है-स्ट्रेटेजिक सड़कों (Strategic roads) का तेज़ निर्माण, भारी भारवाले पुलों (Heavy-load bridges) का निर्माण और ऊँचाई वाले क्षेत्रों की सुरंगों (High-altitude tunnels) का समय पर पूरा होना। इन सुधारों ने भारत की सैन्य तैयारी और नागरिक कनेक्टिविटी (Civilian connectivity), दोनों को नई ऊँचाई दी है।

प्रश्न 3. सेना के साथ-साथ स्थानीय लोगों के जीवन में BRO किस प्रकार निर्णायक भूमिका निभा रहा है? दिन-रात काम करते हुए आपको किन-किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है और उन्हें पार करते हुए आप किस तरह लोगों की मदद कर रहे हैं?

उत्तर- BRO ने देश के सबसे दुर्गम और ऊँचाई वाले क्षेत्रों में ऐतिहासिक परियोजनाएँ पूरी की हैं। हिमाचल प्रदेश की अटल सुरंग (Atal Tunnel, 9.02 km) दुनिया की सबसे लंबी हाईवे सुरंग है जो 10,000 फीट से ऊपर बनी है और मनाली-लेह यात्रा को 4-5 घंटे कम करती है। अरुणाचल की सेला सुरंग (Sela Tunnel, 13,000 ft) अब तवांग तक ऑल वेदर एक्सेस (All-weather access) देती है। लद्दाख में DS-DBO सड़क ने अग्रिम चौकियों तक सप्लाई लाइन (Supply line) सुनिश्चित की है। शिंकुन ला सुरंग (Shinkhun La Tunnel, 15,800 ft), न्योमा एयरफ़ील्ड (Nyoma Airfield), अरुणाचल फ्रंटियर हाईवे (Arunachal Frontier Highway) और वेस्टर्न सिक्किम हाईवे (Western Sikkim Highway) जैसे प्रोजेक्ट निर्माणाधीन हैं। इनसे स्थानीय जनता का अलगाव घटा है, अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिला है और आपातकालीन सेवाएँ (Emergency services) सुलभ हुई हैं। BRO के कर्मियों को भयंकर ठंड, बर्फबारी, भूस्खलन और ऑक्सीजन की कमी जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, लेकिन इन सबके बावजूद संगठन ने सेना के साथ-साथ सीमावर्ती गाँवों के जीवन को बदल डाला है।

प्रश्न 4. आने वाले समय में आपके कार्यों से क्या अंतर दिखाई देगा?

उत्तर- BRO ने अपनी कार्यशैली और तकनीकी क्षमता को पूरी तरह नया रूप दिया है। EPC मॉडल (EPC model), नई मशीनरी (Machinery) और प्रोसेस रिफ़ॉर्म्स (Process reforms) ने तेज़ प्रोजेक्ट एक्सेक्यूशन (Project execution) संभव किया है। REJUPAVE तकनीक ने ऊँचाई वाले क्षेत्रों (High-altitude areas) में ठंडे मौसम में कंक्रीटिंग (Cold-weather concreting) को भी संभव बनाया है। कट-एंड-फ़िट टेक्नोलॉजी (Cut-and-Fit technology), प्री-कास्ट कलवर्ट्स (Pre-cast culverts) और इंटरलॉकिंग ब्लॉक्स (Interlocking blocks) का उपयोग सड़क निर्माण को और तेज़ और टिकाऊ बना रहा है। GRSE के साथ 95 मेड-इन-इंडिया मॉड्यूलर ब्रिजेस (Modular bridges) पर MoU हुआ है, जिनमें से 42 लॉन्च हो चुके हैं। लद्दाख में DS-DBO सड़क पर दो कट-एंड-कवर सुरंगें (Cut-and-cover tunnels) बन रही हैं ताकि बर्फीले तूफ़ानों में भी आवाजाही बनी रहे। आने वाले वर्षों में सड़कों, पुलों, सुरंगों और हवाई पट्टियों का विस्तार सीधा सीमा तक होगा, जिससे सेना और नागरिक दोनों को स्थायी, सुरक्षित और तेज़ कनेक्टिविटी (Connectivity) मिलेगी।

प्रश्न 5. लद्दाख में आने वाले प्रमुख प्रोजेक्ट्स कौन-कौन से हैं? अरुणाचल प्रदेश में भी क्या नई तैयारियाँ की जा रही हैं?

उत्तर- लद्दाख हमेशा से ऐसा क्षेत्र रहा है जहाँ BRO की मज़बूत मौजूदगी रही है और यह आज भी संगठन का प्राथमिक फोकस (Primary focus) है। शिंकुन ला सुरंग (Shinkhun La Tunnel), न्योमा एयरफ़ील्ड (Nyoma Airfield) और निम्मू-पदुम-दारचा सड़क (Nimmu-Padum-Darcha Road) जैसी परियोजनाएँ ऐतिहासिक बदलाव लाने वाली हैं। DS-DBO सड़क पर चल रहे दो कट-एंड-कवर टनल (Cut-and-cover tunnels) भी सुनिश्चित करेंगे कि पूरे साल कनेक्टिविटी (Connectivity) बनी रहे। वहीं अरुणाचल प्रदेश में सेला सुरंग (Sela Tunnel) जैसी परियोजनाएँ बड़ी सफलता साबित हुई हैं, क्योंकि इसने पूरे साल के लिए तवांग को सुरक्षित और भरोसेमंद संपर्क प्रदान किया है। आगे चलकर अरुणाचल फ्रंटियर हाईवे (Arunachal Frontier Highway) जैसी परियोजनाएँ भी रणनीतिक (Strategic) दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण होंगी और पूर्वोत्तर क्षेत्र को देश की मुख्यधारा से जोड़ने में अहम भूमिका निभाएँगी। आने वाले वर्षों में ये प्रोजेक्ट लद्दाख और अरुणाचल, दोनों को स्थायी रूप से देश से जोड़ देंगे।

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