नई दिल्ली: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एक फरवरी को बजट 2026 पेश करेंगी। इस बार वे बजट की 75 साल पुरानी परंपरा पर ब्रेक लगा सकती हैं। सूत्रों के हवाले से एनडीटीवी द्वारा प्रकाशित खबर के मुताबिक अब यूनियन बजट में ज्यादातर बातें पार्टी ए में होती थीं जबकि पार्टी बी सिर्फ टैक्स और पॉलिसी अनाउंसमेंट तक ही सीमित रहता था। लेकिन इस बार 75 साल की परंपरा टूट सकती है। सूत्रों के मुताबिक वित्त निर्मला सीतारमण अपने भाषण के पार्ट B का इस्तेमाल भारत के इकोनॉमिक भविष्य के लिए एक डिटेल्ड विज़न बताने के लिए करेंगी।
एक नए रोडमैप की उम्मीद
सूत्रों ने कहा कि इस बार, पार्ट B में शॉर्ट-टर्म प्रायोरिटी और लॉन्ग-टर्म गोल, दोनों को बताने की उम्मीद है। इसमें देश की स्थानीय ताकत और वैश्विक आकांक्षाओं के बीच तालमेल बिठाते हुए अल्पकालिक प्राथमिकताओं और दीर्घकालिक लक्ष्यों का खाका पेश किया जाएगा। भारत और विदेश के आर्थिक विशेषज्ञ इस पर करीब से नज़र रख रहे हैं, और एक ऐसे रोडमैप की उम्मीद कर रहे हैं जो रूटीन टैक्स बदलावों से कहीं आगे हो।
पहले भी परंपरा तोड़ चुकी हैं निर्मला सीतारमन
यह निर्मला सीतारमण का लगातार नौवां बजट होगा। उन्होंने 2019 में अपने पहले बजट में भी लेदर ब्रीफकेस (जो बजट डॉक्यूमेंट्स ले जाने के लिए दशकों से इस्तेमाल हो रहा था ) की परंपरा को तोड़ दिया था और बजट दस्तावेजों को लाल कपड़े में लपेट कर पारंपरिक 'बही-खाता' का रूप दिया था। पिछले चार वर्षों की तरह इस बार भी बजट पूरी तरह पेपरलेस होगा, जो आधुनिक और डिजिटल भारत की तस्वीर पेश करेगा।

बता दें कि चालू वित्त वर्ष (2025-26) के लिए इसके जीडीपी के 4.4 प्रतिशत पर रहने का अनुमान लगाया गया है। बजट में 4.5 प्रतिशत से नीचे का लक्ष्य हासिल करने के बाद, बाजार अब कर्ज-जीडीपी अनुपात में कमी की दिशा में आगे बढ़ने के लिए सटीक आंकड़ों का इंतजार कर रहा है। उम्मीद है कि सरकार वित्त वर्ष 2026-27 के लिए चार प्रतिशत के राजकोषीय घाटे की घोषणा कर सकती है।
चालू वित्त वर्ष के लिए सरकार का नियोजित पूंजीगत व्यय 11.2 लाख करोड़ रुपये तय किया गया है। निजी क्षेत्र के निवेशकों की सावधानी को देखते हुए, सरकार आगामी बजट में बुनियादी ढांचे पर खर्च को बनाए रख सकती है और इसमें 10-15 प्रतिशत की वृद्धि कर सकती है। यह राशि 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक होने की संभावना है।
इन क्षेत्रों पर रहेगा विशेष ध्यान
बजट में न केवल आर्थिक आंकड़ों, बल्कि सामाजिक सुरक्षा पर भी जोर रहने की उम्मीद है। 'G RAM G' जैसी विशेष योजनाओं के साथ-साथ शिक्षा और स्वास्थ्य (Health & Education) क्षेत्र के बजट आवंटन पर सबकी नजरें टिकी होंगी। विदेशी और भारतीय अर्थशास्त्री एक ऐसे रोडमैप की प्रतीक्षा कर रहे हैं जो रूटीन टैक्स बदलावों से ऊपर उठकर भारत को 21वीं सदी के दूसरे क्वार्टर में एक महाशक्ति के रूप में स्थापित करे।