नई दिल्लीः सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने पाकिस्तान का बिना नाम लिए एक बार फिर दुश्मन को चेतावनी दी है। शनिवार को एनडीए की 150वीं पासिंग-आउट परेड में आर्मी चीफ ने कहा कि 'ऑपरेशन सिंदूर' अभी भी जारी है। फिलहाल अभी केवल संघर्ष विराम चल रहा है, लेकिन सशस्त्र बल पूरी तरह से ऑपरेशनल रूप से सतर्क हैं और भविष्य में किसी भी तरह के तनाव या टकराव के लिए तैयार हैं'।
तीनों सेनाएं कर रही हैं तैयारी
जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा, 'भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना के साथ मिलकर भविष्य में पैदा होने वाली संभावित आपात स्थितियों के लिए सक्रिय रूप से तैयारी कर रही है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि फिलहाल हमारा मुख्य ध्यान तीनों सेनाओं के बीच तालमेल को मज़बूत करने, युद्ध की तैयारियों को बेहतर बनाने और भविष्य के युद्धों की ज़रूरतों के हिसाब से खुद को ढालने पर है'।
उन्होंने कहा कि निगरानी (surveillance) और खुफिया क्षमताओं के कारण अब दुश्मन को हमारी ज़्यादातर हलचलें 'रियल-टाइम' में ही दिखाई दे जाती हैं। उन्होंने कहा, "24 घंटे, सातों दिन युद्धक्षेत्र इतना पारदर्शी हो गया है कि हमारी हर हलचल की जानकारी दूसरी तरफ (दुश्मन) को तुरंत मिल जाती है। इस बात पर ज़ोर देते हुए उन्होंने कहा कि सीमावर्ती इलाकों में सैनिकों की तैनाती, ऑपरेशनल योजना बनाने और सैनिकों व आम नागरिकों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के मामले में अब पहले से कहीं ज़्यादा सावधानी बरतने की ज़रूरत है।
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सेना प्रमुख ने की ये अपील
सेना प्रमुख ने आज के दौर के संघर्षों में 'सूचना युद्ध' (information warfare) के बढ़ते महत्व पर भी ज़ोर दिया। उनके अनुसार, राष्ट्रीय एकता और भरोसेमंद सूचना स्रोतों पर विश्वास ये दो ऐसे अहम कारक हैं जो किसी भी संघर्ष में हमारी सफलता को तय करते हैं। उन्होंने कहा, "सूचना युद्ध तभी सफल हो सकता है, जब पूरा देश एकजुट होकर उन लोगों पर भरोसा करे जो उन्हें जानकारी दे रहे हैं।"
हर जवान को ड्रोन उड़ाना आना चाहिए
जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा कि जब से मैंने यह पद संभाला है, मैंने हमेशा कहा है 'ईगल ऑन द आर्म्स' (Eagle on the Arms), जिसका मतलब है कि हर जवान को ड्रोन उड़ाना आना चाहिए। इसके लिए ट्रेनिंग हमारी अकादमियों और दूसरी जगहों पर चल रही है। जब मैं दिसंबर में यहां आया था, तो मैंने खुद सेना की ट्रेनिंग टीम को 4-6 बड़े ड्रोन और सिमुलेटर दिए थे... क्योंकि जब कैडेट यहां से युद्ध के मैदान में जाएंगे, तो वहां इतने सारे ड्रोन होंगे कि अगर उन्होंने यह हुनर नहीं सीखा, तो उन्हें उन्हें समझने में मुश्किल होगी..."।
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