Saturday, May 25, 2024
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बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ चार्ज फ्रेम पर सुनवाई टली, इस मामले में 26 अप्रैल को कोर्ट सुनाएगा फैसला

रेसलर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के पूर्व अध्यक्ष और सांसद बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ चार्ज फ्रेम पर सुनवाई टल गई है। बृजभूषण शरण सिंह ने जो पहले याचिका दी है उस पर 26 अप्रैल को कोर्ट फैसला सुनाएगी।

Reported By : Abhay Parashar Written By : Mangal Yadav Updated on: April 18, 2024 11:55 IST
 सांसद बृजभूषण शरण सिंह - India TV Hindi
Image Source : FILE-PTI सांसद बृजभूषण शरण सिंह

नई दिल्लीः रेसलर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के पूर्व अध्यक्ष और सांसद बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ चार्ज फ्रेम पर सुनवाई टल गई है। बृजभूषण शरण सिंह ने जो पहले याचिका दी है उस पर 26 अप्रैल को कोर्ट फैसला सुनाएगी। उसके बाद चार्ज फ्रेम पर सुनवाई होगी। मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने कोर्ट को बताया कि सीडीआर रिपोर्ट गैर जरूरी दस्तावेज़ है। शिकायतकर्ता के वकील ने कहा कि CDR रिपोर्ट ट्रायल का विषय है उसकी अभी ज़रूरत नहीं है। बृजभूषण के वकील ने कहा कि सीडीआर रिपोर्ट बहुत महत्वपूर्ण है। सीडीआर रिपोर्ट के आधार पर 7 सितंबर की तारीख अस्तित्व में आ जायेगी। कोर्ट ने कहा पहले एप्लिकेशन पर फैसला होगा उसके बाद चार्जफ्रेम पर बात करेंगे।

बृजभूषण शरण सिंह ने दायर की है ये याचिका

महिला रेस्टलर छेड़छाड़ मामले में बृजभूषण शरण सिंह की तरफ से कोर्ट में एक एप्लीकेशन लगाई गई जिसमें कहा गया है कि एक शिकायतकर्ता के बयान में विरोधभास है। शिकयतकर्ता के मुताबिक वो जब wfi के दफ्तर गयी थी तो उसके साथ छेड़छाड़ कि गयी थी जबकि बृजभूषण ने कहा कि वो उस समय देश मे नहीं थे। जिसके एविडेंस में बृजभूषण ने पासपोर्ट की कॉपी भी लगाई है। लिहाजा उस मामले की एक बार फिर जांच के लिए याचिका लगाई गई है।

बृजभूषण के वकील ने दिया ये तर्क

बृजभूषण के वकील ने कहा कि हमने सीडीआर खोजने की कोशिश की थी लेकिन हमको वह दस्तावेज़ों में नहीं मिला। 7 सितंबर की तारीख रिकॉर्ड में कहीं पर भी नहीं हैं। इस पर कोर्ट ने पूछा कि आपने यह मुद्दा पहले क्यों नहीं उठाया था। बृजभूषण के वकील ने कहा कि मामले में बहुत ज़्यादा दस्तावेज़ थे। हमने सीडीआर को खोजने की कोशिश किया था हमको नहीं मिला इस लिए हम चार्ज फ़्रेम होने के समय इस मुद्दे को उठा रहे हैं। बृजभूषण के वकील ने कहा कि अगर सीडीआर की रिपोर्ट है तो अभी दे दें। सही समय है इस मुद्दे को उठाने का। आगे इस मुद्दे को नही उठाया जा सकेगा, इसी लिए हम कह रहे हैं कि CDR रिपोर्ट पर लगा दें, नहीं तो इस बिंदु पर जांच का निर्देश दिया जाए। कोर्ट ने पूछा कि सीडीआर रिपोर्ट पर आ जाए, तो फिर आप बहस के लिए समय लेंगे। 

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