Monday, December 08, 2025
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'बुक किए गए पार्सल में क्रेडिट कार्ड, पासपोर्ट और नशीला पदार्थ मिला,' डिजिटल अरेस्ट कर महिला से 32 करोड़ की ठगी

पीड़ित महिला ने 187 लेनदेने के माध्यम से 32 करोड़ रुपये डिजिटल अरेस्ट करने वाले आरोपियों के खाते में ट्रांसफर कर दी। अंत में महिला की मानसिक संतुलन बिगड़ गया और वह बीमार हो गई।

Edited By: Dhyanendra Chauhan @dhyanendraj
Published : Nov 17, 2025 03:54 pm IST, Updated : Nov 17, 2025 04:55 pm IST
सांकेतिक तस्वीर- India TV Hindi
Image Source : FREEPIK सांकेतिक तस्वीर

बेंगलुरु की 57 वर्षीय एक महिला ने 'डिजिटल अरेस्ट' स्कैम में लगभग 32 करोड़ रुपये गंवा दिए। इस संबंध में मामला दर्ज कर जांच की जा रही है। धोखेबाजों ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) अधिकारी बनकर स्काइप के माध्यम से महिला पर लगातार निगरानी रखकर उसे 'डिजिटल अरेस्ट' की स्थिति में रखा और उसकी दहशत का फायदा उठाकर उससे सारी वित्तीय जानकारी हासिल की तथा 187 बैंक अंतरण करने के लिए दबाव डाला। 

कॉल करके महिला पर लगाए गए ये आरोप

शहर के इंदिरानगर की सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने अपनी शिकायत में कहा कि अंत में 'क्लीयरेंस लेटर' मिलने तक धोखबाजों ने उसे छह महीने से अधिक समय तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ के धोखे में रखा। इसकी शुरुआत 15 सितंबर, 2024 को एक व्यक्ति के फोन से हुई, जिसने डीएचएल अंधेरी से होने का दावा करते हुए आरोप लगाया कि उसके नाम से बुक किए गए पार्सल में क्रेडिट कार्ड, पासपोर्ट और ‘एमडीएमए’ है और उसकी पहचान का दुरुपयोग किया गया है। मेथिलीन-डाइऑक्सीमेथाम्फेटामीन (MMDA) एक मादक पदार्थ होता है। 

आरोपियों ने फर्जी सीबीआई अधिकारियों से महिला की कराई बात

इससे पहले कि महिला कोई जवाब दे पाती, कॉल खुद को सीबीआई अधिकारी बताने वाले व्यक्तियों के पास स्थानांतरित कर दी गई, जिन्होंने उसे धमकाया और दावा किया कि सारे सबूत आपके खिलाफ हैं। महिला को दो स्काइप आईडी बनाने और वीडियो पर बने रहने का निर्देश दिया गया था। 

आरोपियों ने एक हफ्ते तक महिला पर रखी नजर

मोहित हांडा नामक एक व्यक्ति ने दो दिन तक उस पर नजर रखी, उसके बाद राहुल यादव ने एक हफ्ते तक उस पर नजर रखी। एक और जालसाज प्रदीप सिंह ने खुद को सीबीआई का वरिष्ठ अधिकारी बताया और उस पर अपनी बेगुनाही साबित करने का दबाव डाला। 

टैक्स के लिए अलग से किया भुगतान

उमारानी ने 24 सितंबर से 22 अक्टूबर तक अपने वित्तीय विवरण साझा किए और बड़ी रकम हस्तांतरित की। उन्होंने 24 अक्टूबर और तीन नवंबर के बीच दो करोड़ रुपये की कथित जमानत राशि जमा की, जिसके बाद टैक्स के लिए और भुगतान किया गया। 

मानसिक तनाव के चलते पीड़ित महिला की बिगड़ी तबीयत

पीड़िता को एक दिसंबर को ‘क्लियरेंस लेटर’ मिला लेकिन इतने दिनों तक तनाव झेलने के बाद वह गंभीर रूप से बीमार पड़ गई, जिससे उबरने और ठीक होने में एक महीने का समय लगा। दिसंबर के बाद घोटालेबाजों ने प्रोसेसिंग शुल्क की मांग की और बार-बार रिफंड को फरवरी और फिर मार्च तक टालते रहे। 26 मार्च, 2025 को सभी तरह का संवाद बंद हो गया। पीड़िता ने कहा, '187 लेनदेन के माध्यम से मुझसे लगभग 31.83 करोड़ रुपये की राशि वसूली गई, जो मैंने ही जमा की थी।' (भाषा के इनपुट के साथ)

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