Wednesday, December 10, 2025
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बुजुर्ग दंपत्ति को साइबर ठगों ने किया डिजिटल अरेस्ट, लूट लिए 2.4 करोड़ रुपये

केरल जिले के कासरगोड जिले में साइबर ठगों ने एक बुजुर्ग दंपत्ति को ऑनलाइन ठगी का शिकार बनाया है। 11 दिनों तक चले डिजिटल अरेस्ट के दौरान साइबर ठगों ने उनसे 2.4 करोड़ रुपये ठग लिए हैं।

Edited By: Avinash Rai @RaisahabUp61
Published : Aug 28, 2025 06:21 pm IST, Updated : Aug 28, 2025 06:21 pm IST
Cyber ​​thugs have digital arrest old couple in kerala looted more than 2 crore rupees- India TV Hindi
Image Source : PTI प्रतीकात्मक तस्वीर

केरल में कासरगोड जिले के कान्हागड में 11 दिन तक ‘‘डिजिटल अरेस्ट’’ में रखे जाने के बाद साइबर धोखेबाजों ने एक बुजुर्ग दंपति से 2.4 करोड़ रुपये की ठगी की। पुलिस ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। ‘डिजिटल अरेस्ट’ में साइबर अपराधी फर्जी सरकारी अधिकारी बनकर वीडियो कॉल के माध्यम से लोगों को डरा-धमकाकर उनसे बड़ी रकम वसूलते हैं। पुलिस के अनुसार, पीड़ित 69 वर्षीय सेवानिवृत्त एक शिक्षक और उनकी 72 वर्षीय पत्नी हैं, जो एक सेवानिवृत्त सरकारी होम्योपैथी चिकित्सक हैं। यह दंपति कान्हागड में एक किराए के मकान में अकेला रहता है। 

रिटायर्ड शिक्षक ने सुनाई पूरी कहानी

सेवानिवृत्त शिक्षक ने कहा, ‘‘दस अगस्त की सुबह मेरी पत्नी को एक अंतरराष्ट्रीय नंबर से कॉल आया। मैंने फोन उठाया तो हिंदी में बोल रहे एक व्यक्ति ने दावा किया कि वह भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) से है। उसने कहा कि मेरी पत्नी केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा जांचे जा रहे धनशोधन के एक मामले में शामिल है और एजेंसी का एक अधिकारी जल्द ही उनसे संपर्क करेगा।’’ उन्होंने कहा कि कुछ मिनट बाद, दंपति को एक व्हाट्सएप वीडियो कॉल आया। उन्होंने कहा, ‘‘स्क्रीन पर पुलिस की वर्दी पहने एक आदमी था जिसने हमें शांत रहने को कहा। जल्द ही एक अनुवादक कॉल में शामिल हो गया और हिंदी से मलयालम में अनुवाद करने लगा। 

धोखेबाजों ने दिखाया फर्जी आधार कार्ड

उन्होंने दावा किया कि जेट एयरवेज के पूर्व अध्यक्ष नरेश गोयल के आवास पर छापेमारी के दौरान मेरी पत्नी का पहचान पत्र और बैंक विवरण बरामद हुए थे। सबूत के तौर पर उन्होंने एक एटीएम कार्ड भी दिखाया, हालांकि विवरण स्पष्ट नहीं थे। उन्होंने आरोप लगाया कि गोयल और मेरी पत्नी के बीच वित्तीय लेन-देन हुआ था।’’ सेवानिवृत्त शिक्षक ने कहा कि जब उन लोगों ने दिखाए गए बैंक में कोई खाता होने से इनकार किया, तो धोखेबाजों ने उनके नाम का एक फर्जी आधार कार्ड दिखाया। 

वीडियो कॉल के जरिए ऑनलाइन सुनवाई का झांसा

उन्होंने कहा, ‘‘उन्होंने हमें हर समय वीडियो कॉल चालू रखते हुए मोबाइल फोन के सामने रहने का आदेश दिया। हमें बुनियादी जरूरतों के लिए भी स्क्रीन पर दिख रहे व्यक्ति से अनुमति लेनी पड़ती थी। मेरी पत्नी को डॉक्टर के पास जाने के लिए भी अनुमति लेनी पड़ती थी।’’ उन्होंने कहा कि 12 अगस्त को धोखेबाजों ने बताया कि उनके मामले की सुनवाई मुंबई की सीबीआई अदालत में ऑनलाइन तरीके से की जाएगी। 

2.4 करोड़ का लगाया चूना

उन्होंने कहा, ‘‘हमें एक अदालत कक्ष दिखाया, जहां एक न्यायाधीश और वकील मौजूद थे। जब न्यायाधीश अंदर आए, तो हमें खड़े होने का निर्देश दिया गया। हमारे नाम पुकारे गए और कुछ चर्चाएं हुईं, लेकिन हम समझ नहीं पाए कि क्या कहा जा रहा था।’’ बाद में, उन्हें बताया गया कि उनके बैंक खातों को ‘‘सत्यापित’’ करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि 19 से 21 अगस्त के बीच, दंपति ने निर्देशानुसार चार लेन-देन में 2.4 करोड़ रुपये हस्तांतरित कर दिए। कासरगोड साइबर पुलिस ने 22 अगस्त को भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 316(4) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66(डी) के तहत मामला दर्ज किया।

(इनपुट-भाषा)

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