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ED ने पकड़ा MBBS एडमिशन में घोटाला, छात्रों ने फर्जी NRI दस्तावेजों का इस्तेमाल किया, पढ़ें पूरा मामला

 Reported By: Atul Bhatia, Edited By: Subhash Kumar
 Published : Aug 25, 2025 06:25 pm IST,  Updated : Aug 25, 2025 07:52 pm IST

ED ने MBBS के लिए मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन में घोटाले का पर्दाफाश किया है। जानकारी के मुताबिक, छात्रों ने एडमिशन के लिए फर्जी NRI दस्तावेजों का इस्तेमाल किया है।

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सांकेतिक फोटो। Image Source : PTI/FREEPIK

प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन में घोटाले का पर्दाफाश किया है। ईडी ने एक ऐसे रैकेट का पर्दाफाश किया है जो NRI कोटे के तहत छात्रों को मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन दिलाने के लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल करता था। जांच में सबसे हैरान कर देने वाला खुलासा ये भी हुआ है कि प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों ने फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल करने वाले छात्रों को एमबीबीएस पाठ्यक्रम में लगभग 18,000 दाखिले दिए हैं। ये खुलासा विदेश मंत्रालय और भारतीय दूतावासों की सहायता से की गई जांच में हुआ है।

जांच में क्या-क्या पता लगा?

ED की ओर से की गई जांच में इस बात का खुलासा हुआ है कि प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों ने NRI के दूतावास के दस्तावेज और फर्जी वंशावली जैसे दस्तावेजों को तैयार करने के लिए एजेंटों को पैसे दिए थे। ज्यादातर मामलों में, एजेंटों और मेडिकल कॉलेजों ने कई कैंडिडेट्स के लिए एक ही तरह के डॉक्यूमेंट्स का इस्तेमाल किया था। ईडी द्वारा इस मामले में पश्चिम बंगाल और ओडिशा के विभिन्न निजी मेडिकल कॉलेजों और उनके प्रमुख व्यक्तियों, एजेंटों और अन्य संबंधित व्यक्तियों के परिसरों में तलाशी ली गई है। 

नियमों से हुआ खिलवाड़

ईडी ने जब परिसरों में छापेमारी की उस दौरान कई फर्जी एनआरआई सर्टिफिकेट और अमेरिका में काम कर रहे नोटरी अधिकारियों की मुहरें बरामद हुई हैं। आपको बता दें कि नियम के मुताबिक, NRI कोटे से मेडिकल कॉलेज में एडमिशन लेने वाले छात्रों की फीस उनके किसी NRI रिश्तेदार द्वारा चुकाई जानी होती है। हालांकि, ईडी की जांच में पता लगा है कि अधिकतर मामलों में ये फीस NRI परिवार के सदस्यों द्वारा नहीं चुकाई गई थी।

सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के मुताबिक, सिर्फ प्रथम डिग्री' और 'द्वितीय डिग्री' वाले NRI रिश्तेदार ही एनआरआई कोटे के छात्रों के स्पॉन्सर बनने के योग्य हैं। हालांकि, ज्यादातर मामलों में फीस छात्र के परिवार द्वारा चुकाई गई है। इस कारण भारत में विदेशी मुद्रा का प्रवाह, विफल हो गया है जो कि एनआरआई कोटे की सीटों पर प्रवेश देने के मुख्य उद्देश्यों में से एक है।

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