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'इसका अंत कहां होगा? माफी मांगें', स्टैंड-अप कॉमेडियन्स के मजाक पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

Reported By : Atul Bhatia Edited By : Kajal Kumari Published : Aug 25, 2025 12:44 pm IST, Updated : Aug 25, 2025 12:44 pm IST

स्टैंडअप कॉमेडियन की मजाक उड़ाने वाले आपत्तिजनक बातों पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी की है, कोर्ट ने कहा है, कमाई के लिए मजाक बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। इसके लिए आपको माफी मांगनी चाहिए। जानें कोर्ट ने और क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी- India TV Hindi
Image Source : FILE PHOTO (ANI) सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी

इंडियाज़ गॉट लेटेंट विवाद से जुड़े मामले को लेकर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस जाॅयमाल्या बागची ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा,  हास्य को अच्छी तरह से लिया जाता है और यह जीवन का एक अभिन्न अंग है, हम खुद पर हंसते हैं। लेकिन जब हम दूसरों पर हंसने लगते हैं और संवेदनशीलता को ठेस पहुंचाते हैं। सामुदायिक स्तर पर जब हास्य उत्पन्न होता है, तो यह समस्या बन जाता है। और यही बात आज के तथाकथित प्रभावशाली लोगों को ध्यान में रखनी चाहिए।

सार्वजनिक तौर पर माफी मांगनी चाहिए

 

जस्टिस बागची ने कहा, अभिव्यक्ति की आजादी को कुछ लोग भाषण का व्यवसायीकरण कर रहे हैं। किसी खास वर्ग की भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए समुदाय का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। यह केवल अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं, बल्कि व्यावसायिक भाषण है। सुप्रीम कोर्ट ने समय रैना समेत सोशल मीडिया के प्रभावशाली लोगों को निर्देश दिया और कहा-वे अपने पॉडकास्ट और कार्यक्रम में दिव्यांगों का उपहास करने के लिए माफी मांगें।

इस मामले पर जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि अधिकारों और कर्तव्यों में संतुलन होना चाहिए। हास्य कलाकार समय रैना व अन्य के वकील ने कहा कि हमने बिना शर्त माफ़ी मांग ली है। प्रतिवादी पिछले आदेश के अनुसार उपस्थित हैं। इसपर जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि अगली बार हमें बताएं कि हम आप पर कितना जुर्माना लगाएं। 

कोर्ट ने सरकार से गाइडलाइंस जारी करने को कहा

जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि आज बात विकलांगों की है, अगली बार बात महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों, बच्चों की हो सकती है... इसका अंत कहां होगा? कोर्ट ने सभी को माफी मांगने के लिए कहा है। कोर्ट ने कहा यूट्यूब में सभी माफी मांगे। कोर्ट नवंबर के में सुनवाई करेगा। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से सोशल मीडिया पर विकलांगों, महिलाओं, बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों का अपमान करने या उनका उपहास करने वाले भाषणों पर अंकुश लगाने के लिए दिशानिर्देश बनाने को कहा।

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