मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 9.12 लाख करोड़ रुपये का रिकॉर्ड बजट पेश किया है। वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने राज्य विधानसभा में यह बजट प्रस्तुत किया। यह प्रदेश के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा बजट है और इसे अगले वर्ष की शुरुआत में प्रस्तावित विधानसभा चुनावों से पहले आखिरी पूर्ण बजट के रूप में देखा जा रहा है। उत्तर प्रदेश का कुल बजट परिव्यय पाकिस्तान के वित्तीय वर्ष 2025-26 के संघीय बजट (PKR 17.573 ट्रिलियन, लगभग 5.69 लाख करोड़ रुपये) से भी काफी अधिक है। यह बजट पाकिस्तान के बजट से करीब 1.5 गुना बड़ा है। करीब 25 करोड़ की आबादी वाले उत्तर प्रदेश का बजट न केवल पाकिस्तान से बड़ा है, बल्कि बांग्लादेश, नेपाल और श्रीलंका के संयुक्त बजट से भी अधिक बताया जा रहा है।
पूंजीगत व्यय 19.5 प्रतिशत
वित्त मंत्री सुरेश खन्ना के अनुसार, कुल बजट का 19.5 प्रतिशत हिस्सा पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) के लिए निर्धारित किया गया है। 16वें केंद्रीय वित्त आयोग की सिफारिशों के मुताबिक, जिसे केंद्र सरकार ने स्वीकार किया है, वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राजकोषीय घाटे की सीमा तीन प्रतिशत तय की गई है। यह सीमा वर्ष 2030-31 तक लागू रहेगी।
शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि पर विशेष जोर
बजट में शिक्षा के लिए कुल परिव्यय का 12.4 प्रतिशत और स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए छह प्रतिशत आवंटित किया गया है। वहीं कृषि एवं संबद्ध सेवाओं के लिए कुल बजट का नौ प्रतिशत निर्धारित किया गया है। उत्तर प्रदेश श्री अयोध्या तीर्थ विकास परिषद के लिए अयोध्या क्षेत्र में पर्यटन अवसंरचना विकास हेतु 150 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
औद्योगिक विकास को बढ़ावा
बुनियादी ढांचे और औद्योगिक विकास के लिए 27,103 करोड़ रुपये का प्रस्ताव रखा गया है, जो वर्ष 2025-26 की तुलना में 13 प्रतिशत अधिक है। मुख्यमंत्री औद्योगिक क्षेत्र विस्तार एवं नए औद्योगिक क्षेत्र प्रोत्साहन योजना के लिए 5,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा, विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) और फॉर्च्यून 500 कंपनियों के निवेश को आकर्षित करने के उद्देश्य से लागू प्रोत्साहन नीति 2023 के लिए 1,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।






































