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क्या कहता है संविधान का आर्टिकल 75, कैसे तय होती है मंत्रियों की शक्तियां और जवाबदेही? जानें सबकुछ

 Edited By: Malaika Imam @MalaikaImam1
 Published : Jul 21, 2025 09:45 am IST,  Updated : Jul 21, 2025 10:09 am IST

Article 75 of Indian Constitution: भारतीय संविधान का अनुच्छेद 75 मंत्रियों के संबंध में है। यह अनुच्छेद बताता है कि कैसे भारत की मंत्रिपरिषद का गठन होता है और यह कैसे संसद के प्रति जवाबदेह है।

अनुच्छेद 75 के बारे में जानिए- India TV Hindi
अनुच्छेद 75 के बारे में जानिए

Article 75 of Indian Constitution: भारतीय संविधान का अनुच्छेद 75 (Article 75) भारत की संसदीय प्रणाली की नींव रखता है, जिसमें मंत्रियों की नियुक्ति, उनके कार्यकाल, उत्तरदायित्व और योग्यता से संबंधित अहम प्रावधानों के बारे में जानकारी दी गई है। यह आर्टिकल बताता है कि कैसे भारत की मंत्रिपरिषद का गठन होता है और यह कैसे विधायिका (संसद) के प्रति जवाबदेह है।

प्रधानमंत्री की नियुक्ति

आर्टिकल 75 के अनुसार, भारत के प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। व्यवहारिक रूप से राष्ट्रपति आमतौर पर उस व्यक्ति को प्रधानमंत्री नियुक्त करते हैं, जिन्हें लोकसभा में बहुमत का समर्थन प्राप्त होता है। प्रधानमंत्री की सलाह पर ही राष्ट्रपति अन्य मंत्रियों की भी नियुक्ति करते हैं, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि प्रधानमंत्री अपनी पसंद की टीम के साथ काम कर सकें।

आर्टिकल 75 में बदलाव

  1. 91वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2003 ने आर्टिकल 75 में एक महत्वपूर्ण बदलाव किया। इसके तहत, अनुच्छेद 75(1A) जोड़ा गया, जिसमें यह प्रावधान किया गया कि मंत्रिपरिषद में प्रधानमंत्री सहित मंत्रियों की कुल संख्या लोकसभा के कुल सदस्यों की संख्या के 15% से अधिक नहीं हो सकती है। इस प्रावधान का मकसद बड़े मंत्रिमंडलों पर अंकुश लगाना और सरकार के आकार को नियंत्रित करना था।
  2. इसी संशोधन के तहत अनुच्छेद 75(1B) भी जोड़ा गया, जो दल-बदल से संबंधित है। यदि संसद का कोई सदस्य 10वीं अनुसूची (दल-बदल विरोधी कानून) के तहत अयोग्य घोषित किया जाता है, तो उसे उस अवधि के लिए मंत्री के रूप में नियुक्त होने से भी अयोग्य माना जाएगा, जब तक उसकी अयोग्यता समाप्त नहीं हो जाती या वह फिर से निर्वाचित नहीं हो जाता।

मंत्रियों के संबंध में जानकारी
Image Source : INDIATVमंत्रियों के संबंध में जानकारी

मंत्रियों का कार्यकाल

मंत्रियों का पद राष्ट्रपति की इच्छा पर निर्भर करता है, जैसा कि आर्टिकल 75(2) में वर्णित है। इसका मतलब है कि राष्ट्रपति किसी भी मंत्री को उसके पद से हटा सकते हैं। हालांकि, असल में राष्ट्रपति यह कार्रवाई प्रधानमंत्री की सलाह पर ही करते हैं।

आर्टिकल 75(3) संसदीय लोकतंत्र का एक आधारभूत सिद्धांत स्थापित करता है, जिसमें मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होगी। इस प्रावधान का मतलब है कि मंत्रिपरिषद के सभी सदस्य अपने निर्णयों और नीतियों के लिए संयुक्त रूप से जिम्मेदार होते हैं। यदि लोकसभा मंत्रिपरिषद के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित करती है या किसी सरकारी नीति को अस्वीकार करती है, तो पूरी मंत्रिपरिषद को इस्तीफा देना पड़ता है।

अनुच्छेद 75 में संशोधन
Image Source : INDIATVअनुच्छेद 75 में संशोधन

शपथ और योग्यता शर्तें

  1. मंत्री पद ग्रहण करने से पहले उन्हें अनुच्छेद 75(4) के तहत राष्ट्रपति द्वारा पद और गोपनीयता की शपथ लेनी होती है। यह शपथ उन्हें अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक पालन करने और सरकारी रहस्यों को गोपनीय रखने के लिए बाध्य करती है।
  2. मंत्रियों की योग्यता के संबंध में आर्टिकल 75(5) एक महत्वपूर्ण शर्त रखता है, जिसमें यदि कोई व्यक्ति लगातार छह महीने की अवधि तक संसद के किसी भी सदन (लोकसभा या राज्यसभा) का सदस्य नहीं है, तो वह उस अवधि की समाप्ति पर मंत्री नहीं रहेगा।

मंत्रियों के वेतन और भत्ते

अनुच्छेद 75(6) मंत्रियों के वेतन और भत्तों से संबंधित है। इसमें कहा गया है कि उनके वेतन और भत्ते संसद द्वारा कानून बनाकर निर्धारित किए जाएंगे। 

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