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मनोहर लाल खट्टर ने 'चैलेंजेज टू इंटरनल सिक्योरिटी ऑफ इंडिया' बुक के सातवें संस्करण का किया लोकार्पण

 Edited By: Mangal Yadav @MangalyYadav
 Published : Sep 09, 2025 07:21 pm IST,  Updated : Sep 09, 2025 09:02 pm IST

केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने दिल्ली के हंसराज कॉलेज में अशोक कुमार और विपुल अनेकांत द्वारा लिखित पुस्तक 'भारत की आंतरिक सुरक्षा की चुनौतियां' के सातवें संस्करण का विमोचन किया।

पुस्तक लांच करते केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल- India TV Hindi
पुस्तक लांच करते केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल Image Source : X@MLKHATTAR

नई दिल्लीः केंद्रीय ऊर्जा एवं शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने दिल्ली विश्वविद्यालय के हंसराज कॉलेज में मंगलवार को पूर्व डीजीपी उत्तराखण्ड एवं वर्तमान में स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी ऑफ हरियाणा, राई सोनीपत के कुलपति अशोक कुमार द्वारा लिखित “चैलेंजेज टू इंटरनल सिक्योरिटी ऑफ इंडिया” पुस्तक के सातवें संस्करण का लोकार्पण किया। 

मनोहर लाल ने बुक की तारीफ की

मनोहर लाल ने पुस्तक को राष्ट्रीय महत्व की दृष्टि से आवश्यक बताते हुए कहा कि भारत की आंतरिक सुरक्षा अनेक आयामों से प्रभावित होती है। छात्रों, प्रशासनिक सेवाओं के अभ्यर्थियों और नीति-निर्माताओं के लिए यह पुस्तक मार्गदर्शक सिद्ध होगी। यह विषय केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय महत्व है। साथ ही साथ आम नागरिक को भी आंतरिक सुरक्षा की समझ होना अति आवश्यक है क्योंकि जब तक वे सजग नहीं होंगे, सरकार अकेले आतंकवाद, नक्सलवाद, ड्रग्स एवं अवैध घुसपैठ जैसी गंभीर समस्याओं से नहीं निबट सकती। 

मनोहर लाल ने कहा कि हमारी सरकार ने कश्मीर, नक्सलवाद और पूर्वोत्तर उग्रवाद जैसी चुनौतियों को काफी हद तक नियंत्रित किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए अवैध घुसपैठ की समस्या को रेखांकित किया है। यह इस बात का प्रमाण है कि यह केवल प्रशासनिक चुनौती नहीं है, बल्कि यह हमारे देश की सुरक्षा और विकास से जुड़ा हुआ प्रश्न है। मुझे पूरा विश्वास है कि इन प्रयासों से भारत इन समस्याओं से भी मुक्ति पाने में सफल होगा। लेकिन, केवल सरकार या पुलिस-प्रशासन के प्रयास पर्याप्त नहीं हैं।

मनोहर लाल ने युवाओं से की ये अपील

इसमें सबसे महत्वपूर्ण भूमिका हमारी युवा पीढ़ी की है। युवाओं के कंधों पर ही विकसित भारत का सपना टिका है। इस अवसर पर मैं विशेष रूप से देश के युवाओं से आह्वान करना चाहता हूँ वे इस पुस्तक को केवल परीक्षा की दृष्टि से न देखें, बल्कि इसे पढ़कर देश की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को समझें। अपनी सोच और दृष्टिकोण को व्यापक बनाएं। और सबसे बढ़कर, अपने जीवन में अनुशासन और जिम्मेदारी को अपनाएं। इस दौरान उन्होंने स्वामी दयानन्द एवं महत्मा हंसराज की मूर्तियों पर माल्यार्पण भी किया।

पुस्तक के लेखक ने कही ये बात

पुस्तक के लेखक अशोक कुमार ने बताया की यह पुस्तक कश्मीर नक्सलवाद और आतंकवाद जैसे गंभीर मुद्दों पर है। यह मुझे एक बुनियादी विचार की ओर ले जाता है। राष्ट्रीय सुरक्षा की ज़िम्मेदारी केवल पुलिस या सेना पर नहीं छोड़ी जा सकती। यह न केवल यूपीएससी वर्ग में नंबर एक पुस्तक बनी, बल्कि व्यापक रूप से चर्चा में भी रही। इसकी लोकप्रियता इतनी अधिक रही कि कई लोगों ने इसके हिस्सों को अपनी अध्ययन सामग्री में सीधे उपयोग करना शुरू कर दिया। इस प्रतिक्रिया ने मेरे विश्वास को और मजबूत किया कि वास्तव में इस विषय पर गंभीर कार्य की आवश्यकता थी। प्रत्येक संस्करण में हमने कुछ नया और उपयोगी जोड़ने का प्रयास किया। इसका सातवाँ और नवीनतम संस्करण विशेष है, क्योंकि इसमें विषय को सीधे समसामयिक घटनाओं से जोड़ा गया है।

दिल्ली पुलिस के विशेष आयुक्त (अपराध) देवेश चंद्र श्रीवास्तव थे विशेष वक्ता

कार्यक्रम में विशेष वक्ता के रूप में दिल्ली पुलिस के विशेष आयुक्त (अपराध) देवेश चन्द्र श्रीवास्तव ने अपने विचार रखे। उन्होंने व्यावहारिक अनुभवों के आधार पर सुरक्षा के बदलते स्वरूप पर प्रकाश डाला। इस दौरान मैकग्रा हिल इंडिया के प्रबंध निदेशक ललित सिंह, प्रो. (डा.) रमा, प्राचार्य हंसराज कॉलेज, पूर्व डीजीपी हरियाणा मनोज यादव, आरपीएफ उत्तराखंड के पूर्व आईपीएस  एसके भगत, फॉर्मर डीजी नमामी गंगे श्री जी अशोक, बीएसएफ फॉर्मर आईजी एसपी सिंह, आईपीएस डा. राजेश मोहन, डॉ. प्रभांसु ओझा एवं बड़ी संख्या में विद्वानों, शिक्षाविदों, पुलिस अधिकारियों एवं छात्रों ने भाग लिया।

 

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