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'पत्नी-बेटे से नहीं करता बात, दरवाजे पर बैठी रहती है मां', जानिए विमान हादसे में जिंदा बचे 'विश्वास रमेश' का दर्द

 Published : Nov 03, 2025 05:05 pm IST,  Updated : Nov 03, 2025 06:17 pm IST

अहमदाबाद प्लेन हादसे में इकलौते जिंदा बचे विश्वास रमेश अब अकेलापन और मानसिक पीड़ा से जूझ रहे हैं। विमान हादसे का दर्द उनके पूरे परिवार के अंदर बैठ गया है। ये हादसा उनके परिवार के लिए सदमा लेकर आया है।

मानसिक पीड़ा से जूझ रहे विश्वास रमेश- India TV Hindi
मानसिक पीड़ा से जूझ रहे विश्वास रमेश Image Source : PTI

अहमदाबाद एयर इंडिया प्लेन क्रैश के इकलौते जीवित बचे विश्वास कुमार रमेश अब गहरे अकेलेपन और मानसिक पीड़ा से जूझ रहे हैं। ब्रिटिश नागरिक रमेश, जो 12 जून, 2025 को हुए इस भयावह हादसे में चमत्कारिक रूप से बच निकले थे। विश्वास कुमार रमेश खुद को सबसे भाग्यशाली आदमी मानते हैं, लेकिन प्लेन हादसे की दर्दनाक यादें उन्हें तोड़ रही हैं और वह घर पर किसी से बात भी नहीं कर रहे हैं। प्लेन हादसे की भयावह त्रासदी के बाद शारीरिक और मानसिक रूप से उन्हें पीड़ा झेलनी पड़ रही है। 

एकदम अकेले पड़ गए विश्वास रमेश

इस दुर्घटना में 241 लोगों की जान गई थी। रमेश ही इकलौते शख्स थे, जो इस विमान में जिंदा बचे हैं। इस हादसे में उनके सगे भाई की भी मौत हो गई थी, जो उनसे कुछ ही सीट दूर बैठे हुए थे। वहीं, अब रमेश ने कहा कि वह एकदम अकेले पड़ गए हैं। अपनी पत्नी और बेटे से भी बात नहीं कर रहे हैं।

भाई के जाने का खालीपन

बीबीसी को दिए इंटरव्यू में ब्रिटिश नागरिक रमेश ने इस हादसे में बच निकलने का गहरा दुख साझा किया है। उन्होंने कहा, 'मैं अकेला जीवित बचा हूं। फिर भी मुझे विश्वास नहीं हो रहा है। यह एक चमत्कार है।' अपने भाई के जाने से एक गहरा खालीपन आ गया है। नम आंखों वाले रमेश ने कहा, 'मैंने भी अपने भाई को खो दिया। मेरा भाई ही मेरी रीढ़ थी। पिछले कुछ सालों में उसने हमेशा मेरा साथ दिया है।'

इस बीमारी से भी जूझ रहे विश्वास रमेश

उन्होंने आगे कहा, 'अब मैं अकेला हूं। मैं अपने कमरे में अकेला बैठा रहता हूं, अपनी पत्नी या बेटे से बात नहीं करता। मुझे अपने घर में अकेला रहना पसंद है।' विमान हादसे के बाद रमेश को पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTSD) का पता चला है। 

अब किसी से बात करना नहीं है पसंद- रमेश

उन्होंने कहा कि उनका परिवार अभी भी इस त्रासदी से उबर नहीं पाया है और उनका छोटा भाई अब इस दुनिया में नहीं है। उन्होंने कहा, 'इस दुर्घटना के बाद मेरे और मेरे परिवार के लिए यह शारीरिक और मानसिक रूप से बहुत कठिन है। पिछले चार महीनों से मेरी मां हर दिन दरवाजे के बाहर बैठी रहती हैं, बिना बात किए और कुछ भी नहीं करतीं। मैं किसी और से बात नहीं कर रहा हूं। मुझे किसी और से बात करना पसंद भी नहीं है। मैं ज्यादा बात नहीं कर सकता। मैं सारी रात सोचता रहता हूं, मैं मानसिक रूप से पीड़ित हूं। पूरे परिवार के लिए हर दिन दर्दनाक है।'

कंधे, घुटने और पीठ में लगातार दर्द

रमेश ने दुर्घटना में लगी शारीरिक चोटों के बारे में भी बात की है। विमान हादसे के दौरान किसी तरह 11A सीट से बाहर निकलने के बाद उनके शरीर पर चोटे भी आईं थीं। उनके पैर, कंधे, घुटने और पीठ में लगातार दर्द के कारण वे काम नहीं कर पा रहे हैं और गाड़ी भी नहीं चला पा रहे हैं। रमेश ने कहा घर में पड़े-पड़े मैं ठीक से चल भी नहीं पाता हूं, इस पर मेरी पत्नी धीरे-धीरे मदद करती है।

दीव में मछली पकड़ने का व्यवसाय भी हुआ बंद

रमेश का साथ दे रहे संजीव पटेल ने कहा, 'वे मानसिक, शारीरिक और आर्थिक रूप से संकट में हैं। दीव में रमेश का पारिवारिक मछली पकड़ने का व्यवसाय था, जिसे वह अपने भाई के साथ मिलकर चलाते थे, दुर्घटना के बाद से ये व्यवसाय बंद हो गया है। उन्होंने कहा, 'यह बेहद दुखद है कि हमें आज यहां बैठकर रमेश से इस स्थिति पर बात कर रहे हैं। आज यहां एयर इंडिया के अधिकारियों को बैठना चाहिए, जो इन हालातों के लिए जिम्मेदार हैं। 

एयर इंडिया ने दिया 25.09 लाख रुपये का मुआवजा

टाटा समूह के स्वामित्व वाली एयर इंडिया ने कहा कि कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी शोक संवेदना व्यक्त करने के लिए परिवारों से मिलने आते रहे हैं। एयर इंडिया ने रमेश को 21,500 पाउंड (25.09 लाख रुपये) का अंतरिम मुआवजा देने की पेशकश की है, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया है। रमेश के साथियों का कहना है कि यह उनकी तत्काल जरूरतों को पूरा करने के लिए काफी नहीं है।

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