Monday, April 15, 2024
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Rajat Sharma’s Blog | दिल्ली में बाढ़ : ड्रेनेज प्रणाली में सुधार ज़रूरी

दिल्ली में जो ड्रेनेज सिस्टम है, वो अंग्रेजों के ज़माने का है, खासतौर पर पुरानी दिल्ली का तो ड्रैनेज सिस्टम इस तरह के हालात का सामना करने के लिए बिल्कुल नहीं हैं. जो नाले हैं, उनकी कभी ठीक से सफाई नहीं होती.

Rajat Sharma Written By: Rajat Sharma
Updated on: July 18, 2023 6:16 IST
इंडिया टीवी के चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा।- India TV Hindi
Image Source : इंडिया टीवी इंडिया टीवी के चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा।

दिल्ली और आसपास के राज्यों में मौसम विभाग ने अगले दो दिन हल्की से तेज़ बारिश होने का संकेत दिया है, लेकिन अभी राजधानी में बाढ़ की स्थिति चिंताजनक है. दिल्ली में बाढ़ के पुराने सारे रिकॉर्ड टूट गए. बसें, ट्रक, गाड़ियां पानी में डूबी हैं, सड़कों पर नाव चल रही है. दिल्ली का करीब बीस प्रतिशत इलाका पानी में डूबा हुआ है. NDRF की 12 टीमें तैनात हैं. यमुना खतरे के निशान से साढ़े तीन मीटर ऊपर बह रही है. मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल कह रहे हैं कि इन्द्रप्रस्थ ड्रेन रेगुलेटर बाढ़ में टूट गया जिसकी वजह से यमुना का पानी शहर के कई इलाकों में घुसा. उनकी सरकार के मंत्री सौरभ भारद्वाज ने शिकायत की कि NDRF टीम को बुलाने की मांग करने के बावजूद डिप्टी कमिशनर ने उनकी बात नहीं सुनी. उपराज्यपाल वी. के. सक्सेना ने कहा कि ये समय एक दूसरे पर आरोप लगाने का नहीं है. सबको मिलकर काम करना चाहिए. लेकिन आखिर बाढ़ की ये हालत कैसे हुई.  मैंने अपना बचपन पुरानी दिल्ली के इन्ही इलाकों में गुजारा है, मैंने पहले  कभी इस तरह के हालात नहीं देखे. 1978 की बाढ़ भी मैंने देखी है. उस वक्त तो लालकिले से आगे का इलाका इतना डेवलप नहीं हुआ था, पुरानी दिल्ली में पानी भरा था. राजघाट पर भी पानी था. लेकिन आज हालात काफी खराब हैं. आमतौर पर यमुना खादर, यमुना बाजार, निगम बोध घाट, मॉनेस्ट्री मार्केट जैसे इलाकों में तो हर साल पानी आता है, लेकिन यमुना का पानी सड़क और तटबंधों को पार करके रिहाइशी इलाकों में घुस गया है, इसलिए स्थिति चिंताजनक है. सरकार की तरफ से कहा गया कि यमुना का जल स्तर एक-दो दिन में कम हो जाएगा. दिल्ली में तीन बड़े वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट बाढ़ के कारण बंद कर दिये जाने से पूरी दिल्ली में पीने के पानी की समस्या पैदा हो गई है. केजरीवाल कह रहे हैं जब तक बाढ़ का पानी नहीं उतरता, प्लांट को फिर से चालू नहीं किया जा सकता.

दिल्ली में बाढ़ के जो हालात बने हैं, उसके लिए हथिनीकुंड बैराज से छोड़े गए पानी को जिम्मेदार बताया जा रहा है. दावा किया जा रहा है कि हथिनीकुंड बैराज से पानी का बहाव कम हुआ है, इसलिए दिल्ली में यमुना का जलस्तर स्थिर हुआ है. इस बात में थोड़ी सच्चाई है. लेकिन अगर उत्तराखंड और हिमांचल में तेज बारिश होती है, तो दिल्ली वालों को मुसीबत के लिए तैयार रहना चाहिए. मैंने कई विशेषज्ञों से, टाउन प्लानर्स से बात की. मौसम वैज्ञानिकों से पूछा कि आखिर दिल्ली में इस तरह के हालात की वजह क्या है. सबने कहा कि हथिनीकुंड बैराज से छोड़ा गया पानी सिर्फ एक वजह है. लेकिन दूसरे कारण भी हैं. दिल्ली में जो ड्रेनेज सिस्टम है, वो अंग्रेजों के ज़माने का है, खासतौर पर पुरानी दिल्ली का तो ड्रैनेज सिस्टम इस तरह के हालात का सामना करने के लिए बिल्कुल नहीं हैं. जो नाले हैं, उनकी कभी ठीक से सफाई नहीं होती. दिल्ली की आबादी जिस हिसाब से बढ़ी है, उसके हिसाब से ड्रेनेज सिस्टम को सुधारा नहीं गया है. दूसरी बात, यमुना की डीसिल्टिंग नहीं होती, इसलिए नदी की जल वहन क्षमता कम होती जा रही है. तीसरी बात, यमुना के रिवर बैड पर कब्जा करके लोग बस गए हैं, घर बन गए हैं. जिन इलाकों में बाढ़ के हालात हैं, वो ज्यादातर रिवर बैड पर हैं. इसलिए नदी शहर में नहीं आई है, शहर नदी में पहुंच गया है. जब तक ये हालात नहीं बदलेंगे, इस तरह की समस्याओं का सामना करना ही पड़ेगा. मेंने कल ही आपको IIT गांधीनगर के प्रोफेसर की बात सुनवाई थी,  जो कह रहे थे कि ग्लोबल वॉर्मिंग के कारण इस तरह की extreme weather conditions हर साल होंगी. इसका मतलब ये है कि दिल्ली वालों को भी इस तरह की मुसीबतें झेलने की आदत डालनी पड़ेगी.

पटना लाठीचार्ज : दोषियों पर कार्रवाई हो

बिहार की राजधानी पटना में गुरुवार को पुलिस लाठीचार्ज में बीजेपी के एक जिला पदाधिकारी की मौत हो गई. एक सांसद को भी लाठियां पड़ी. दर्जनों कार्यकर्ता घायल हो गए, किसी का हाथ टूटा, सिर फूटा, किसी की टांग टूटी. बीजेपी ने कहा है कि वो कार्यकर्ता की मौत के लिए नीतीश कुमार के खिलाफ हत्या का केस दर्ज करवाएगी जबकि पुलिस का दावा है कि बीजेपी कार्यकर्ता की मौत लाठीचार्ज से नहीं हुई,  भगदड़ में वो बेहोश हो गया था. पटना में बीजेपी ने नीतीश सरकार के ख़िलाफ़ प्रोटेस्ट मार्च निकाला था. शिक्षक भर्ती के नियमों में बदलाव, दस लाख नौकरियां देने के वादे और तेजस्वी यादव के खिलाफ चार्जशीट को लेकर प्रदर्शन गांधी मैदान में था. बीजेपी कार्यर्ताओं को डाक बंगला चौराहे तक जाना था. लेकिन डाक बंगला चौराहे से पहले पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोक दिया. बैरीकेड फांदने की कोशिश में धक्का मुक्की हुई. बीजेपी सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल पुलिस वालों से बात करना चाह रहे थे लेकिन पुलिस ने लाठियां चलानी शुरू कर दी. जो सामने आया, उस पर लाठियां बरसाईं. दौड़ा- दौड़ा कर कार्यकर्ताओं को पीटा, न बुज़ुर्गों का ख़याल किया, न महिलाओं का. बीजेपी सांसद सिग्रीवाल पर भी पुलिस ने लाठी से कई वार किए. जहानाबाद के बीजेपी ज़िला महामंत्री विजय कुमार सिंह लाठी लगने के कारण बेहोश हो गए. अस्पताल ले जाते समय उनकी मौत हो गई.

पटना में पुलिस ने जो बर्बरता की, उसकी जितनी निंदा की जाए, कम है. पुलिस ये कहकर नहीं बच सकती कि बीजेपी कार्यकर्ता की मौत लाठी खाने से नहीं हुई. कैमरों में साफ़ दिखाई दे रहा है कि पुलिस ने जमकर लाठियां चलाईं. किसी का सिर फूटा, किसी के हाथ-पैर टूटे, कितनों का ख़ून बहा, और कितने लोग चोट खाकर अस्पताल पहुंचे. जब ऐसे प्रदर्शन होते हैं, तो थोड़ी बहुत ज़ोर ज़बरदस्ती तो होती है. आगे बढ़-चढ़कर वर्कर, बैरीकेड फांदने की कोशिश भी करते हैं, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि पुलिस क्रूरता पर उतर आए, प्रदर्शन करने वालों को बेरहमी से कुचला जाए.  ऐसा लगता है कि जैसे पुलिस को पहले से निर्देश दिए गए थे कि प्रोटेस्ट करने वालों की पिटाई करनी है. अब कम से कम नीतीश कुमार को अपनी पुलिस का बचाव करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए, जो पुलिसवाले दोषी हैं, उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई होनी चाहिए. (रजत शर्मा)

देखें: ‘आज की बात, रजत शर्मा के साथ’ 13 जुलाई, 2023 का पूरा एपिसोड

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