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Rajat Sharma's Blog | NEET पेपर लीक: ज़िम्मेदारी कौन तय करेगा?

 Published : May 30, 2026 01:12 pm IST,  Updated : May 30, 2026 01:12 pm IST

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये मसला लाखों बच्चों के भविष्य से जुड़ा है, इसलिए इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता। नीट पेपर लीक होने के बाद डॉक्टर्स एसोसिएशन समेत कई संस्थाओं ने NTA को खत्म करके परीक्षा का नया सिस्टम बनाने की मांग की थी।

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इंडिया टीवी के चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा। Image Source : INDIA TV

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने माना कि National Testing Agency (NTA)  की परीक्षा प्रणाली में कुछ कमियां हैं, CBSE के OSM पेपर चैकिंग सिस्टम में कुछ खामियां रह गई थी, सरकार पूरे सिस्टम को दुरूस्त कर रही है। धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि जो गड़बड़ी हुई, शिक्षामंत्री होने के नाते वो उसकी जिम्मेदारी लेते हैं और यकीन दिलाते हैं कि भविष्य में गड़बड़ी नहीं होगी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से सख्त सवाल पूछे। कोर्ट ने पूछा कि जो कदम अब उठाए जा रहे हैं, वो पहले क्यों नहीं उठाए गए? अगर गड़बड़ी हुई तो क्या सरकार ने लापरवाही करने वालों की जिम्मेदारी फिक्स की? अगर अब तक गड़बड़ी करने वालों की पहचान ही नहीं हुई है तो फिर ये गारंटी कैसे दी जा सकती है कि फिर पेपर लीक नहीं होगा?

सरकार की तरफ से बताया गया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी खुद इस मामले पर नजर रख रहे हैं, पेपर सुरक्षित तरीके से परीक्षा केंद्रों तक पहुंचे, इसके लिए वायु सेना की मदद लेने पर भी विचार किया जा रहा है, IIT के एक्सपर्ट्स की मदद ली जा रही है, पेपर सैट करने से लेकर परीक्षा कराने और आन्सर शीट्स की चेकिंग तक पूरे सिस्टम को टेक्नोलॉजी driven बनाने की कोशिश की जा रही है, human interference जीरो रहेगा, और गड़बड़ी की गुंजाइश नहीं बचेगी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर एक परीक्षा कराने के लिए प्रधानमंत्री को हस्तक्षेप करना पड़े तो ये पूरे सिस्टम के लिए शर्मनाक है।

सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी फटकार लगाई, पूछा, आख़िर बार-बार पेपर लीक क्यों हो रहे हैं? पिछली बार जो पेपर लीक हुआ था उसके बाद सरकार और  NTA ने लीक रोकने के लिए क्या कदम उठाए? किसकी ज़िम्मेदारी तय की गई है? दोषियों पर क्या कार्रवाई की? या  जांच के नाम पर सिर्फ़ लीपापोती की जा रही है? सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये मसला लाखों बच्चों के भविष्य से जुड़ा है, इसलिए इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता। नीट पेपर लीक होने के बाद डॉक्टर्स एसोसिएशन समेत कई संस्थाओं ने NTA को खत्म करके परीक्षा का नया सिस्टम बनाने की मांग की थी।

2015 से लेकर अब तक मेडिकल प्रवेश परीक्षा का पेपर 5 बार लीक हो चुका है, NTA बनने के बाद तीन बार NEET का पेपर लीक हो गया, इसीलिए NTA की क्षमता पर सवाल उठ रहे हैं। धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि सरकार ने पेपर सैट करने से लेकर परीक्षा केंद्र तक पेपर पहुंचाने के पूरे सिस्टम में जहां जहां कमियां नजर आईं, उन्हें दुरुस्त किया है, पहली बार NEET का पेपर परीक्षा केंद्र तक पहुंचाने में वायुसेना की मदद लेने का फैसला किया गया है। धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि प्रधानमंत्री ने भी कुछ सुझाव दिए हैं, उन पर भी अमल हो रहा है।

सुप्रीम कोर्ट की बात सही है कि अगर एक परीक्षा पेपर को लीक होने से बचाने के लिए प्रधानमंत्री को हस्तक्षेप करना पड़े तो ये सब के लिए शर्म की बात है। अगर सिस्टम इतना कमजोर है कि पेपर परीक्षा केंद्रों  तक सुरक्षित पहुंचाने के लिए वायु सेना की मदद लेनी पड़े तो ये चिंता की बात है। शिक्षा मंत्री की ये बात सही है कि अगर पेपर सैट करने वाले ही पेपर लीक करने लगे, अगर अनुवाद करने वाले लालच में अंधे हो जाएं, तो क्या किया जा सकता है? लेकिन क्या करना है, कैसे करना है, इसकी जिम्मेदारी शिक्षा मंत्री की है। बेईमानी और लूट करने वालों के पाप का खामियाजा परीक्षा देने वाले 22 लाख छात्र क्यों भुगतें? एक-एक छात्र के साथ पूरा परिवार मेहनत करता है, करोड़ों लोगों को  जो परेशानी हुई, उसकी भरपाई सिस्टम कैसे करेगा?

CBSE: टेक्नोलोजी का सोच समझ कर इस्तेमाल करें

NTA के साथ साथ CBSE के ऑन स्क्रीन मार्किंग सिस्टम पर भी सवाल उठ रहे हैं। लाखों छात्रों ने गलत मार्किंग, कॉपी बदलने और नंबर्स के ग़लत टोटल को लेकर शिकायतें की हैं। चार लाख बच्चों ने अपनी ऑन्सर शीट की कॉपी के लिए अप्लाई किया। आन्सर शीट की कॉपी के लिए एप्लाई करने की लास्ट डेट 24 मई थी, लेकिन CBSE की website hang कर गई, फीस का पेमेंट नहीं हुआ। शुक्रवार को CBSE ने ऐलान किया कि जो बच्चे आंसर शीट की कॉपी के लिए या फिर रि-इवैल्युएशन के लिए एप्लाई करना चाहते हैं, वो 1 जून से CBSE की वेबसाइट पर आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए dedicated portal एक जून से काम करना शुरू कर देगा।

धर्मेंद्र प्रधान ने माना कि, CBSE के पोर्टल में टेक्निकल ग्लिच आ रहे थे, पेमेंट गेटवे भी हैक हो गया था, इसीलिए छात्रों को परेशानी हुई। लेकिन अब CBSE ने सिस्टम सुधार लिया है, चार सरकारी बैंकों के साथ पेमेंट क्लियर करने का एग्रीमेंट हो गया है। जिन छात्रों ने एप्लाई किया, पोर्टल पर अपनी डिटेल अपलोड कर दी, वो पेमेंट गेटवे पर जाकर अटक गए। ऐसी शिकायतें दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, लखनऊ, अहमदाबाद सहित कई शहरों से आईं। इस साल CBSE बारहवीं की परीक्षा देने वाले चार लाख से ज़्यादा बच्चों ने कम अंक आने की शिकायतें की, 11 लाख से ज़्यादा स्कैन्ड आंसरशीट  CBSE से मांगी थी। अब तक CBSE 8 लाख से ज़्यादा कॉपी भेज पाया है।

मुश्किल ये है कि जिन बच्चों को कॉपी मिल चुकी है, वो भी परेशान हैं। छात्रों की शिकायत है कि उन्हें कई विषयों में कम नंबर मिले। CBSE 10वीं और 12वी के छात्रों  की कॉपियां ऑन स्क्रीन मार्किंग सिस्टम से जांचे या मैन्युअली शिक्षकों से जंचवाए, लेकिन मार्किंग सही होनी चाहिए। ऐसा कैसे हो सकता है कि बच्चे साल भर पढ़ाई करें, ईमानदारी से इम्तहान दें और जब रिजल्ट आए तो सिर पकड़ कर बैठ जाएं, आन्सर शीट की कॉपी और री-इवैल्यूवेशन के लिए एप्लाई करते रहें? ये लाखों बच्चों के भविष्य का सवाल है, इसलिए इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता। CBSE कोई पहली बार परीक्षा तो करवा नहीं रहा। अगर उसे ऑन स्क्रीन मार्किंग का सिस्टम लागू करना था तो पूरी तैयारी भी करनी चाहिए थी।

अगर ये सिस्टम अमेरिका और यूरोप में कामयाब है तो हमारे यहां भी सफल होगा, ये कैसे मान लिया गया? हमारे यहां सिर्फ नोएडा में जितने बच्चे बारहवीं की परीक्षा देते हैं, उतने जर्मनी, ब्रिटेन, फ्रांस जैसे पूरे देश में नहीं होते। इसीलिए OSM को लागू करने से पहले उसकी क्षमता को भी टेस्ट करना चाहिए था। मुझे लगता है कि टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल काम को जल्दी और आसान करने के लिए होना चाहिए, टेंशन बढ़ाने के लिए नहीं। हर मामले में ये तर्क सही नहीं हो सकता कि ये सिस्टम दुनिया भर में सफल है, तो हमारे यहां भी होगा। CBSE चाहे तो यूपी बोर्ड से कुछ मदद ले सकता है। CBSE में 12वीं के कुल 18 लाख छात्रों ने परीक्षा दी, जबकि यूपी बोर्ड में 24 लाख 86 हज़ार छात्रों ने बारहवीं की परीक्षा दी। मैन्युअली कॉपियां चेक हुईं, CBSE से पहले रिजल्ट आ गया और कहीं कोई शिकायत नहीं आई।

बिहार: टेंडर माफिया पर कार्रवाई

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी आजकल योगी की राह पर चल रहे हैं। अपराधियों और भ्रष्टाचार करने वालों के खिलाफ एक्शन ले रहे हैं। पटना में स्पेशल विजिलेंस यूनिट ने सरकारी टेंडरों में हेराफेरी का घोटाला उजागर किया है। टेंडर में घोटालों के ज़रिए करोड़ों की काली कमाई करने वाले शख्स ऋषु रंजन सिन्हा  को गिरफ्तार किया है।  ये शख्स अफसरों के साथ मिलीभगत करके सरकारी टेंडर मैनेज करता था, जिसको टेंडर दिलाता था उससे नौ परसेंट कमीशन लेता था जिसमें से पांच परशेंट हिस्सा अफसरों को मिलता था। ऋषु रंजन के घर से करीब 2 करोड़ रुपये के सोने और ज़ेवरात, भारी मात्रा में कैश बरामद हुए।

ऋषु रंजन सिन्हा के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के केस में ED भी जांच कर रही है। सबसे ज्यादा ठेके जल संसाधन, नगर विकास और भवन निर्माण विभाग से दिलाए, इसलिए अब इन विभागों की भी जांच की जा रही है। पता ये भी लगा है कि कुछ अफसरों ने फ्रांस, UAE और स्विट्जरलैंड जैसे देशों में प्रॉपर्टी खरीदी है। इन सारी प्रॉप्रटीज को ऋषु सिन्हा ही मैनेज करता था। ऋषु ने पिछले कई सालों में 58 करोड़ रुपए से ज्यादा की 61 प्रॉपर्टी खरीदीं। बिहार में टेंडर माफिया नया नहीं है। समस्या ये है कि ऊपर से लेकर नीचे तक सब मिले रहते हैं, इसलिए कोई एक्शन नहीं होता। अगर अब सम्राट चौधरी ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान चलाया है, हिम्मत दिखाई है तो इसमें तेरा-मेरा नहीं होना चाहिए, एक्शन सबके खिलाफ होना चाहिए, चाहे वो किसी जाति या दल या धर्म का हो। (रजत शर्मा)

देखें: ‘आज की बात, रजत शर्मा के साथ’ 29 मई 2026 का पूरा एपिसोड

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