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'मेरी बेटी को न्याय नहीं मिला', भारत की शहजादी खान को UAE में फांसी मिलने पर बोले पिता

 Edited By: Amar Deep
 Published : Mar 04, 2025 09:12 am IST,  Updated : Mar 04, 2025 09:12 am IST

भारतीय महिला शहजादी खान को अबू धाबी में फांसी दे दी गई है। इस पर शहजादी खान के पिता ने कहा है कि उनकी बेटी को न्याय नहीं मिला है। उन्होंने सरकार से मदद के लिए गुहार लगाई लेकिन उनकी कोई सहायता नहीं की गई।

शहजादी खान को UAE में फांसी मिलने पर पिता ने दिया बयान।- India TV Hindi
शहजादी खान को UAE में फांसी मिलने पर पिता ने दिया बयान। Image Source : FILE

लखनऊ: पिछले महीने अबू धाबी में एक भारतीय महिला शहजादी खान को फांसी की सजा दी गई। वहीं उसके पिता ने आरोप लगाया है कि उनकी बेटी शहजादी खान को न्याय नहीं मिला और भारत सरकार ने परिवार को कोई सहायता नहीं दी। परिवार के वकील अली मोहम्मद ने फांसी को ‘न्यायिक हत्या की आड़ में न्यायेतर हत्या’ करार दिया है। बता दें कि शहजादी खान (33) को अबू धाबी में चार महीने के बच्चे की हत्या के मामले में 15 फरवरी को फांसी दी गई थी। शहजादी उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के गोयरा मुगलई गांव की रहने वाली थी। 

'उसे न्याय नहीं मिला'

शहजादी के पिता शब्बीर खान ने कहा, ‘‘उसे न्याय नहीं मिला, सर। हमने अपनी तरफ से सर्वश्रेष्ठ प्रयास किया। हमने भारत सरकार से संपर्क किया और कई जगहों पर आवेदन दिये, लेकिन हमारे पास न तो पैसे थे और न ही वहां जाकर वकील करने का कोई साधन था। सरकार ने हमारा साथ नहीं दिया।’’ शहजादी खान 10 फरवरी, 2023 से अबू धाबी पुलिस की हिरासत में थी और उसे 31 जुलाई, 2023 को मौत की सजा सुनाई गई थी। उसे फांसी दिये जाने की खबर सोमवार को दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान सामने आई, जब विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की कि उसे पिछले महीने फांसी दी जा चुकी है। उसका अंतिम संस्कार अबू धाबी में पांच मार्च को होगा। 

फांसी मिलने की नहीं थी जानकारी

शहजादी खान के परिवार को 28 फरवरी तक उसे फांसी दिये जाने के बारे में जानकारी नहीं थी। इसकी आधिकारिक पुष्टि होने पर परिवार को जानकारी मिली। शब्बीर खान ने कहा कि उन्होंने अपनी बेटी से आखिरी बार 14 फरवरी को बात की थी। इसके एक दिन बाद ही उसे फांसी दी गई। यह पूछे जाने पर कि क्या सरकार ने कोई समर्थन का आश्वासन दिया था, इस पर शब्बीर खान ने कहा, ‘‘नहीं, हमें कोई सहायता नहीं मिली।’’ उन्होंने कहा कि उनके परिवार ने नेताओं और यहां तक ​​कि फिल्मी हस्तियों से भी संपर्क किया था, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए शब्बीर खान ने कहा, ‘‘योगी जी और मोदी जी की बेटियां नहीं हैं, इसलिए वे इस दर्द को नहीं समझ सकते। अगर उनका कोई करीबी होता, तो वे कार्रवाई करते।’’ 

विदेश मंत्रालय ने दिया जवाब

हालांकि, विदेश मंत्रालय ने सोमवार को कहा कि भारतीय दूतावास ने शहजादी को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) सरकार के सामने दया याचिका और माफी का अनुरोध भेजने समेत हर संभव कानूनी सहायता प्रदान की। संयुक्त अरब अमीरात में शहजादी को एक शिशु की हत्या के आरोप में दोषी ठहराया गया था और उसे मौत की सजा सुनाई गई थी। संयुक्त अरब अमीरात की सर्वोच्च अदालत ‘कोर्ट ऑफ कैसेशन’ ने इस सजा को बरकरार रखा। संयुक्त अरब अमीरात के अधिकारियों ने 28 फरवरी, 2025 को (भारतीय) दूतावास को सूचित किया कि शहजादी की सजा पर अमल स्थानीय कानूनों के अनुसार किया गया। विदेश मंत्रालय ने कहा कि शहजादी के परिवार को मामले की जानकारी दे दी गई है। 

क्यों मिली फांसी की सजा

शब्बीर खान ने बताया कि उनकी बेटी अबू धाबी में नाजिया नाम की एक महिला के लिए काम करती थी, जिसने हाल में एक बच्चे को जन्म दिया था। शब्बीर खान के अनुसार, जब बच्चा चार महीने का था, तो उसे एक टीका लगाया गया था, जो आमतौर पर छह महीने में दिया जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिशु की मौत टीके की वजह से हुई थी, लेकिन शहजादी पर गलत तरीके से हत्या का आरोप लगाया गया और उसे मौत की सजा सुनाई गई। शब्बीर खान ने दावा किया कि बच्चे की मां ने शहजादी की दोषसिद्धि सुनिश्चित करने के लिए अपने प्रभाव का इस्तेमाल किया, जिसके कारण उसे फांसी की सजा मिली।

14 फरवरी को हुई आखिरी बात

शहजादी के पारिवारिक वकील अली मोहम्मद ने सोमवार को बताया कि दिल्ली हाई कोर्ट के समक्ष उनकी नवीनतम याचिका केवल यह पता लगाने के लिए दायर की गई थी कि क्या वह अभी जीवित है या उसे अबू धाबी में फांसी दे दी गई है। उन्होंने कहा, ‘‘हमने भारतीय दूतावास, प्रधानमंत्री कार्यालय और विदेश मंत्रालय को पत्र लिखकर मामले को आगे ले जाने की अपील की। लेकिन अंत में क्या हुआ, हम नहीं कह सकते।’’ मोहम्मद के अनुसार, शहजादी के पिता को 14 फरवरी को एक फोन आया जिसमें बताया गया कि यह उसकी (शहजादी की) इच्छा के अनुसार उसकी आखिरी बातचीत थी और उसे एक या दो दिन में फांसी दे दी जाएगी। 

पांच मार्च को होगा अंतिम संस्कार

वकील ने कहा, ‘‘हमने 21 फरवरी को फिर से प्रधानमंत्री कार्यालय और विदेश मंत्रालय से संपर्क किया, लेकिन कोई जानकारी नहीं दी गई। दो-तीन दिन बाद हमने अदालत में रिट याचिका दायर की और आज आधिकारिक पुष्टि हुई कि उसे फांसी दे दी गई है। उसका अंतिम संस्कार पांच मार्च को अबू धाबी में किया जाएगा।’’ मोहम्मद ने इस दावे का पुरजोर खंडन किया कि भारत सरकार ने कोई आश्वासन दिया था या कोई सहायता प्रदान की। हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि यदि परिवार के सदस्य अंतिम संस्कार के लिए अबू धाबी जाना चाहते हैं, तो सरकार ने सहायता की पेशकश की है। (इनपुट- पीटीआई)

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