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कश्मीर के पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी से तापमान में गिरावट, खेल मैदान बने आकर्षण का केंद्र

कश्मीर के पहाड़ी में बर्फबारी इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। 4 फ़ीट से ज्यादा बर्फ से खेल के मैदान क्रिकेट खेल प्रेमियों के लिए इन दिनों आकर्षण का केंद्र बन गया है।

Manzoor Mir Reported by: Manzoor Mir
Published on: January 19, 2022 14:00 IST
बर्फबारी के बाद क्रिकेट मैदान बदले- India TV Hindi
Image Source : FILE PHOTO बर्फबारी के बाद क्रिकेट मैदान बदले

Highlights

  • गुरेज़ इलाके में 4 से 5 फ़ीट की बर्फ और माइनस 15 डिग्री
  • उत्तरी जम्मू और कश्मीर में श्रीनगर से 123 किलोमीटर दूर है
  • स्पोर्ट्स क्रिकेट क्लब मार्केट द्वारा एक टूर्नामेंट का आयोजन किया गया था

कश्मीर के पहाड़ी में बर्फबारी इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। 4 फ़ीट से ज्यादा बर्फ से खेल के मैदान क्रिकेट खेल प्रेमियों के लिए इन दिनों आकर्षण का केंद्र बन गया है। नियंत्रण रेखा से सटे गुरेज़ इलाके में 4 से 5 फ़ीट की बर्फ और माइनस 15 डिग्री में कश्मीर के युवा क्रिकेट खिलते नज़र आ रहे हैं। कश्मीर घाटी में गुरेज के युवाओं ने क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए जमे हुए मैदान पर एक स्नो क्रिकेट टूर्नामेंट के आयोजन के बाद ध्यान आकर्षित किया है। गुरेज़ घाटी उच्च हिमालय में स्थित है, बांदीपुर से लगभग 86 किलोमीटर और उत्तरी जम्मू और कश्मीर में श्रीनगर से 123 किलोमीटर दूर है।

उच्च अधिकारियों का ध्यान आकर्षित करने और राष्ट्रीय स्तर पर अधिक लोगों तक पहुंचने के लिए, युवाओं द्वारा मरकूट में जमे हुए मैदान पर शीतकालीन खेलों को बढ़ावा देने के लिए टूर्नामेंट का आयोजन किया गया था। स्नो क्रिकेट स्थानीय लोगों के बीच काफी लोकप्रिय हो गया है और स्पोर्ट्स क्रिकेट क्लब मार्केट द्वारा एक टूर्नामेंट का आयोजन किया गया था और कुल 10 टीमों ने हिस्सा लिया था।

सुदूर घाटी में शीतकालीन खेलों के लिए काफी संभावनाएं हैं क्योंकि यह भारी बर्फ से ढकी रहती है, जिसे पर्यटन और खेल प्राधिकरण अब तक पहचानने में विफल रहे हैं। स्थानीय लोगों ने कहा कि जब गुलमर्ग में विभिन्न शीतकालीन खेलों का आयोजन किया जा सकता है, तो सर्दियों के महीनों में गुरेज में इसी तरह के खेल क्यों नहीं आयोजित किए जा सकते क्योंकि इस क्षेत्र में काफी संभावनाएं हैं।

गौरतलब है कि नियंत्रण रेखा पर स्थित गुरेज घाटी सर्दियों के मौसम में भारी हिमपात का गवाह बनती है और बांदीपोरा-गुरेज़ सड़क बंद होने के कारण छह महीने से अधिक समय तक शेष घाटी और बाहरी दुनिया से कटी रहती है।

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