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'चुनाव खर्च की सीमा तय हो', याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया, मांगा जवाब

 Reported By: Atul Bhatia Edited By: Kajal Kumari
 Published : Feb 26, 2026 01:40 pm IST,  Updated : Feb 26, 2026 02:49 pm IST

सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव खर्च को लेकर दायर की गई याचिका पर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है और जवाब मांगा है।

सुप्रीम कोर्ट- India TV Hindi
सुप्रीम कोर्ट Image Source : FILE PHOTO

चुनाव खर्च की सीमा तय करने की मांग वाली याचिका पर, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया। सुप्रीम कोर्ट ने राजनीतिक दलों के चुनावी खर्च पर सीमा तय करने की मांग वाली जनहित याचिका पर केंद्र सरकार और केंद्रीय चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है। यह जनहित याचिका गैर सरकारी संगठन Common Cause की ओर से दायर की गई है, जिसमें चुनावों के दौरान राजनीतिक दलों द्वारा धनबल के  बेलगाम इस्तेमाल को चुनौती दी गई है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले को छह हफ्ते सुनवाई का निर्देश दिया है और संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने तर्क दिया कि चुनाव के दौरान राजनीतिक दलों द्वारा धनबल का अनियंत्रित इस्तेमाल लोकतंत्र की बुनियाद को प्रभावित करता है और चुनावी प्रक्रिया को असंतुलित करता है।

उन्होंने अदालत को याद दिलाया कि इलेक्टोरल बॉन्ड मामले में सुप्रीम कोर्ट पहले ही यह मान चुका है कि अनियंत्रित धनबल लोकतांत्रिक प्रक्रिया को विकृत करता है और मतदाताओं के सूचना के अधिकार को प्रभावित करता है। सुनवाई के दौरान जस्टिस   जॉय माल्या बागची ने धनबल के दुरुपयोग को रोकने से जुड़ी व्यावहारिक चुनौतियों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अमेरिका जैसे देशों में भी चुनावी खर्च की सीमाएं मौजूद हैं, लेकिन वहां भी खर्च को उम्मीदवारों के मित्रों, सहयोगियों या तीसरे पक्षों के माध्यम से किया जाने जैसी समस्याएं सामने आती रही हैं।


तीसरे पक्ष की रिपोर्टों पर भरोसा नहीं कर सकता,

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को चुनाव आयोग को चुनाव में होने वाले अत्यधिक खर्च पर अंकुश लगाने के लिए एसओपी में सुझावों को शामिल करने पर विचार करने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने जनहित याचिका को भी एक अभ्यावेदन के रूप में मानने को कहा है। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्य बागची और जस्टिस एनवी अंजारी की पीठ ने टिप्पणी की थी कि कोर्ट चुनाव में होने वाले अत्यधिक खर्च पर तीसरे पक्ष की रिपोर्टों पर भरोसा नहीं कर सकता, क्योंकि चुनाव आयोग ने भी इन रिपोर्टों का खंडन किया है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता एक आइआइटी स्नातक हैं, उनके द्वारा दिए गए सुझाव विचारणीय हैं।

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