राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत 1 दिन के नासिक प्रवास पर हैं। वह नासिक के चांदवड तालुका के णमोकार तीर्थ स्थल पर अंतरराष्ट्रीय पंचकल्याणक एवं महामास्ताकाभिषेक उत्सव में शामिल हो रहे हैं। इस दौरान आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने संबोधन दिया और भारत देश को लेकर कई अहम बातें कहीं। संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि भारतवर्ष रहेगा तो दुनिया रहेगी। उन्होंने कहा है कि सारे विश्व को सुख का मार्ग देने का समय आ गया है। उन्होंने कहा कि हर एक का अपना-अपना तरीका है, अपना अपना विचार दर्शन है, अपना-अपना रास्ता है, मेरा मेरे लिए सही है, उनका उनके लिए सही है, लेकिन इसको लेकर झगड़ा मत करो।
RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा- "एक शब्द का उपयोग किया गया धर्मावलंबी समाज। यह धर्म का अवलंबन, यह आवश्यक है, अनिवार्य है। आज जितनी सारी समस्याएं मानव जीवन में हैं, अपने देश में हैं या पूरी दुनिया में हैं, वह इसी कारण उत्पन्न हुई है कि हमने धर्म का अवलंबन छोड़ दिया। भारतवर्ष का सौभाग्य है, प्राचीन समय से हमारे हृदय में इस धर्म का अवंलंबन करने कि बुद्धि, जागृत रखने वाली महापुरुषों की परंपरा प्राप्त होती है, अभी भी हो रही है, आगे भी मिलेगी।"
मोहन भागवत ने कहा- "भारत में इतनी सारी विविधता है, पंथ संप्रदायों सहित सभी बातों की, उसको स्वीकार करने की भारत की मनोवृति बनी। हर एक का अपना-अपना तरीका है, अपना-अपना विचार दर्शन है, अपना-अपना रास्ता है। मेरा मेरे लिए सही है, उनका उनके लिए सही है। लेकिन इसको लेकर झगड़ा मत करो, साथ में रहने का अनुशासन पालन करो। वह अनुशासन है अपरिग्रह का।"
मोहन भागवत ने कहा- "मनुष्य जीवन चले, सृष्टि जीवन चले, सतत चलते रहे, इसलिए त्रिशुत्री का रास्ता बताया है। लेकिन रास्ता बार-बार बताना पड़ता है, दिखाना भी पड़ता है। ऐसा जो करने वाले महापुरुष हैं, जिनकी परंपरा चलती है, भारत में उसका हमें लाभ होता है। आज भी चल रहा है, कल भी चलती रहेगी। इसी के आधार पर भारतवर्ष रहेगा, भारतवर्ष रहेगा तो दुनिया रहेगी। सारे विश्व को सुख का मार्ग देने का समय आ गया है, क्योंकि धर्म का संतुलन छोड़कर, धर्म का अनुशासन छोड़कर, दुनिया ने भौतिक विकास की जो राह पकड़ी, 2000 वर्ष उस पर चले, लेकिन उसके परिणाम नहीं मिल रहे। सुविधा बहुत मिल रही है, सुख दूर हो गया।"
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